ट्रंप के लौटते ही पुतिन पहुंचेंगे चीन... जिनपिंग की डिप्लोमेसी पर दुनिया की नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इसी महीने चीन दौरे की खबरों ने वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. एक ही महीने में दोनों नेताओं की बीजिंग यात्रा पर दुनिया की नजर टिकी है.

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शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप (Photo- ITG) शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

वैश्विक राजनीति के लिहाज से मई 2026 बेहद अहम महीना साबित हो सकता है. खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे के तुरंत बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी बीजिंग पहुंच सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका और रूस के नेता एक ही महीने में, और वह भी किसी बहुपक्षीय सम्मेलन के बाहर, चीन का दौरा करेंगे.

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व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप का प्रस्तावित दौरा 14 से 15 मई के बीच हो सकता है. हालांकि अभी चीन ने आधिकारिक तौर पर इन तारीखों की पुष्टि नहीं की है. चीन के विदेश मंत्रालय ने इतना जरूर कहा है कि दोनों देशों के बीच इस यात्रा को लेकर बातचीत जारी है.

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दूसरी तरफ, क्रेमलिन पहले ही संकेत दे चुका है कि पुतिन 2026 के शुरुआती महीने में चीन का दौरा करेंगे. रूसी अधिकारियों के मुताबिक, इस यात्रा की तारीखें लगभग तय हो चुकी हैं और जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है. चीनी मीडिया साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट का कहना है कि यह दौरा ट्रंप के दौरे के बाद ही हो सकता है, यानी मई में ही दोनों बड़ी ताकतों के नेता बीजिंग पहुंच सकते हैं.

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पहले ट्रंप, फिर पुतिन का चीन दौरा

अगर ये दोनों दौरे तय समय पर होते हैं, तो यह कूटनीति की दुनिया में एक बेहद असामान्य और अहम घटना होगी. आमतौर पर अमेरिका और रूस के नेता एक ही मंच पर तभी नजर आते हैं, जब कोई बड़ा बहुपक्षीय सम्मेलन होता है, जैसे G20 या APEC. लेकिन यहां मामला अलग है. यह दो अलग-अलग द्विपक्षीय दौरे हैं, जो एक ही देश में, लगभग एक ही समय पर हो सकते हैं.

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यूक्रेन युद्ध के बाद मजबूत हुए चीन-रूस के रिश्ते

चीन एक तरफ रूस के साथ अपने मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ भी रिश्तों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन और रूस के संबंध और मजबूत हुए हैं, वहीं अमेरिका के साथ व्यापार और टेक्नोलॉजी जैसे मुद्दों पर तनाव बना हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरी घटना का एक और बड़ा संकेत यह है कि चीन अब खुद को एक ग्लोबल पावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. जब दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के नेता एक ही महीने में बीजिंग पहुंचते हैं, तो यह साफ दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चीन की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है.

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