अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जाहिर करते रहे हैं. ट्रंप की पार्टी ने अब उनकी इस मंशा को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को अमेरिकी संसद में एक बिल पेश किया है. फ्लोरिडा से सांसद रैंडी फाइन ने जो बिल अमेरिकी संसद में पेश किया है, उसे 'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट' नाम दिया गया है.
ट्रंप की पार्टी के सांसद की ओर से अमेरिकी संसद में पेश किए गए इस बिल में ग्रीनलैंड को अपने अधीन लेने, भविष्य में अमेरिका का एक राज्य बनाने का कानूनी अधिकार देता है. इस विधेयक का समर्थन करने वाले लोग आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए जरूरी बता रहे हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बिल का कड़ा विरोध हो रहा है और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है.
ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया जाएगा कि ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में हासिल करने या उस पर बातचीत करने के लिए जो भी कदम जरूरी हों, वह उठा सकें. साथ ही, इसमें कांग्रेस को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का प्रावधान भी है, जिसमें ग्रीनलैंड को भविष्य में अमेरिका का राज्य बनाने के लिए जरूरी सुधारों का उल्लेख होगा. ट्रंप समर्थक अमेरिका और यूरोप के बीच रणनीतिक नजरिये से अहम इस द्वीप को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बता रहे हैं.
ट्रंप बोले- ग्रीनलैंड की जरूरत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी रक्षा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह से सुरक्षित बताया है. उन्होंने कहा है कि बीजिंग और मॉस्को के साथ बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच वॉशिंगटन को ग्रीनलैंड की जरूरत है. ट्रंप ने अपने हालिया बयानों में दावा किया कि अमेरिका इस क्षेत्र को हासिल करने के लिए कदम उठा रहा है और यह भी कहा है कि अमेरिका अपने लक्ष्य पूरे कर सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने ग्रीनलैंड के लोगों का जनमत अमेरिका के साथ जाने के पक्ष में तैयार करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन जैसे कदमों पर विचार की बात भी कही है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने इसे लेन-देन जैसा और अपमानजनक बताते हुए आलोचना की है.
डेनमार्क-ग्रीनलैंड बोले: क्षेत्र बिक्री के लिए नहीं
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी रुख को सख्ती से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपने साथ मिलाने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह कहना पूरी तरह बेतुका है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहिए. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने अमेरिका की ओर से इस तरह की बयानबाजी को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया.
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ग्रीनलैंड के एक स्वतंत्रता समर्थक सांसद ने ब्रुसेल्स सिग्नल से कहा कि ग्रीनलैंड के एनेक्सेशन का कोई खतरा नहीं है और अमेरिका के किसी भी दावे का कोई आधार नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने ग्रीनलैंड के जलक्षेत्र में रूसी और चीनी गतिविधियों की निगरानी में कमी को लेकर चिंताओं को स्वीकार भी किया.
यूरोप और नाटो की क्या प्रतिक्रिया
यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य वहां के लोगों के हाथ में है और सहयोगियों को संप्रभु सीमाओं का सम्मान करना चाहिए. नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और फ्रांस के नेताओं ने दोहराया कि ग्रीनलैंड किसी विजय के लिए नहीं है और उसके भविष्य पर निर्णय केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही ले सकते हैं.
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पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क ने चेतावनी दी कि आर्कटिक नीति सहित ट्रांस-अटलांटिक मतभेद यूरोपीय एकता को कमजोर कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि बढ़ती महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के दौर में सामूहिक रक्षा और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
57 हजार के करीब है ग्रीनलैंड की आबादी
ग्रीनलैंड की आबादी करीब 57 हजार है. इस आबादी में अधिकतर लोग स्वदेशी समुदाय से हैं, जो कई सर्वेक्षणों के मुताबिक अमेरिका का हिस्सा बनने का भारी विरोध करता है. डेनमार्क से स्वतंत्रता को लेकर ग्रीनलैंड में लंबे समय से चल रही मुहिम अमेरिकी कवायदों को और जटिल बना सकती हैं. ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ती रणनीतिक रुचि का एक बड़ा कारण रूसी नौसैनिक गतिविधियों के साथ ही आर्कटिक के इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता चीनी निवेश भी है.
रोहित शर्मा