कतर ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर स्थायी ट्रांजिट फीस लगाने के ईरान के प्रस्ताव का विरोध किया है. हालांकि, उसका कहना है कि अस्थायी टोल पर बातचीत की जा सकती है और इससे इस अहम समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही बहाल करने में मदद मिल सकती है.
शनिवार को सिंगापुर में आयोजित एक एशियाई रक्षा सम्मेलन में कतर के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा कि स्थायी फीस का बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, इसलिए कतर इसका विरोध करता है. हालांकि, कुछ समय के लिए होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलने पर विचार किया जा सकता है ताकि वहां से माइंस को हटाने या सुरक्षा के काम में फीस का इस्तेमाल हो सके.
दरअसल, कतर के मंत्री से पूछा गया था कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर कंट्रोल के लिए ईरान टोल वसूल रहा है तो क्या इस संबंध में कतर कोई बातचीत कर रहा है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को ईरान ने फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों के जवाब में बंद कर दिया था, जिससे ऊर्जा संकट पैदा हो गया.
होर्मुज में जहाजों से टोल वसूली का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा
शेख सऊद ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग सम्मेलन में कहा, 'कतर और खाड़ी क्षेत्र के अन्य साझेदार देशों ने बहुत साफ तौर पर कहा है कि किसी भी प्रकार का शुल्क अंततः उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा, इसलिए हम इसके खिलाफ हैं.'
उन्होंने कहा, 'लेकिन अगर कुछ समय के लिए यह कहा जाता है कि फीस का इस्तेमाल समुद्री माइंस हटाने या इसी तरह के किसी खास मकसद के लिए किया जाएगा, तो बातचीत के जरिए यह तय किया जा सकता है.'
अमेरिका, यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के देशों, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी शामिल है, ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए किसी भी टोल लगाने का विचार खारिज कर दिया है.
इस बीच ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया है. ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए उसने कतर सहित कई देशों पर हमला किया है. ऐसे में कतर दोनों देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और साथ ही गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के भीतर ईरान से निपटने के लिए एक साझा रणनीति बनाने पर काम कर रहा है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क