इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया के बाद अब न्यूजीलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा और व्यापार पर बड़ी तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी कर न्यूजीलैंड पहुंच गए हैं. ऑस्ट्रेलिया में सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े कई बड़े समझौते हुए. यह दौरा इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के तीन देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसका मकसद व्यापार, ऊर्जा और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड पहुंच गए हैं (Photo: DD News) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड पहुंच गए हैं (Photo: DD News)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया की तीन दिन की यात्रा पूरी करने के बाद न्यूजीलैंड पहुंचे हैं. ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में कई अहम समझौते हुए. 

प्रधानमंत्री मोदी इस समय इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के तीन देशों के दौरे पर हैं, जिसका मकसद व्यापार, ऊर्जा और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है.

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अपने इस दौरे के आखिरी पड़ाव में पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर ऑकलैंड पहुंचे हैं. ऑस्ट्रेलिया में हुई बड़ी डील्स के बाद अब न्यूजीलैंड में भी उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है.

पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे का पूरा कार्यक्रम इस तरह है. शनिवार को भारतीय समयानुसार, सुबह 3 बजे से 5:30 बजे तक वे गवर्नमेंट हाउस ऑकलैंड में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इसके बाद सुबह 5:30 बजे से 8:45 बजे तक वायाडक्ट बिजनेस सेंटर में खेल और व्यापार से जुड़े कार्यक्रम होंगे. दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक वे भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 2:50 बजे वे दिल्ली के लिए रवाना होंगे.

रविवार 12 जुलाई को भारतीय समयानुसार सुबह 6:40 बजे प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली पहुंचेंगे और इसी के साथ उनका यह तीन देशों का दौरा पूरा हो जाएगा.

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गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ बढ़ती नजदीकी से भारत को व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में नए अवसर मिलने की उम्मीद है. 

ऑस्ट्रेलिया में हुए समझौते खासकर क्रिटिकल मिनरल्स और न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भारत के लिए दीर्घकालिक फायदे वाले माने जा रहे हैं.

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