'दुनिया आज भरोसे की कमी से जूझ रही...', G-7 के मंच से बोले PM मोदी, बगल में बैठे थे ट्रंप

जी-7 यानी कि ग्रुप-7 की मीटिंग में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को 'दाता-याचक' (donor-recipient) के नजरिए से हटकर एकजुटता और समानता पर आधारित साझेदारी की ओर बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि साझेदारी का संबंध सम्मान से है निर्भरता से नहीं. इस संबोधन से पहले पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भेंट की.

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फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट चल रहा है. (Photo: ITG) फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट चल रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:31 AM IST

जी-7 के मंच से वर्ल्ड लीडर्स को मैसेज देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज आपसी भरोसा सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति है. लेकिन दुख की बात है कि आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है. बल्कि भरोसे की कमी है. फ्रांस के एवियन शहर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बैठे पीएम मोदी ने कहा कि हमारी साझेदारियों का भविष्य इसी भरोसे को फिर से कायम करने पर निर्भर करता है. 

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में बैठे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया को 'दाता-याचक' (donor-recipient) के नजरिए से हटकर एकजुटता और समानता पर आधारित साझेदारी की ओर बढ़ना चाहिए.

एवियन में G7 समिट के दौरान 'नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से मजबूत करने' पर आयोजित आउटरीच सेशन में शामिल होते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है, ऐसे में यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. लेकिन साझेदारियां तभी सफल हो सकती हैं जब वे भरोसे पर टिकी हों. 

साझेदारी का मतलब सम्मान, निर्भरता नहीं

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया गया कि 'ग्लोबल साउथ' को दुनिया से बहुत उम्मीदें हैं. उसे सिर्फ़ मदद नहीं, बल्कि साझेदारी चाहिए. हमें मदद देने और लेने वाली सोच से आगे बढ़कर बराबरी के साझेदार के तौर पर काम करना होगा. हमें सिर्फ़ एक-दूसरे के साथ-साथ नहीं, बल्कि मिलकर आगे बढ़ना होगा. साझेदारी का मतलब सम्मान से होना चाहिए, निर्भरता से नहीं. 

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत का मानना ​​है कि साझेदारी की असली कसौटी यह नहीं है कि हम दूसरों के लिए क्या बनाते हैं, बल्कि यह है कि हम उन्हें खुद के लिए कुछ बनाने में कैसे सक्षम बनाते हैं. हमारी विकास साझेदारियां इसी भावना को दर्शाती हैं. हमारी कोशिशें सहयोगी देशों में क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रही हैं. 

इस सेशन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर समेत कई नेताओं ने हिस्सा लिया.

भारतीय नाविकों की मौत पर क्या बोले पीएम मोदी?

इस दौरान पीएम मोदी ने होर्मुज और उसके आसपास समंदर में भारतीय नाविकों की मौत पर सख्त लहजा अपनाते हुए कहा कि हम वेस्ट एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं. इस संघर्ष से वेस्ट एशिया में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है. होर्मु स्ट्रेट में मैरीटाइम ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा. भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी. ग्लोब मैरीटाइम ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और नाविक बिना भय के अपना कार्य कर सकें.

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भारत के लिए मानवता सबसे पहले

मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा 'मानवता सबसे पहले' के नजरिए को अपनाया है. यह भारत की अगुवाई वाली इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन LiFe और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहलों में दिखता है.

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को लेकर भारत का नजरिया 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'दुनिया एक परिवार है' की सदियों पुरानी सोच पर आधारित है. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत "सस्टेनेबल और समावेशी ग्लोबल डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है."

G7 समिट की कार्यवाही शुरू होने से पहले, मोदी ने G7 नेताओं से गर्मजोशी से मुलाकात की. इसी दौरान मंगलवार को लंबे समय बाद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हुई. पीएम मोदी और ट्रंप लगभग 50 सेकेंड बातें करते रहे. इसके बाद पीएम मोदी और ट्रंप आगे के सेशन के लिए एक साथ बैठे.

दुनिया की 7 विकसित देशों का समूह है G-7

ग्रुप ऑफ़ 7 यानी G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है: कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका. यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है.

G7 अपने सदस्यों के लिए एक ऐसा मंच है जहां वे ग्लोबल स्तर पर बड़ी आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा होती है और फिर इनके समाधान पर काम किया जाता है. 
 

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