अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी नौसेना के द्वारा नाकेबंदी लागू करके ईरान के व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को होर्मुज से गुजरने नहीं दे रही. अगर कोई जहाज होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहा है, तो उसे हमले और जब्ती की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है. इससे न केवल ईरान का आयात बाधित हुआ है, बल्कि वैश्विक बाजारों तक उसकी पहुंच भी सीमित हो गई है.
इसी बीच पाकिस्तान ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने छह अहम जमीनी व्यापार मार्ग खोलकर ट्रंप की नाकेबंदी में सेंध लगाने की कोशिश की है. पाकिस्तान ने इन मार्गों को खोलकर ईरान तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक कॉरिडोर तैयार कर दिया है. खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और प्रतिबंधों के चलते कराची सहित पाकिस्तानी बंदरगाहों पर ईरान के लिए जा रहे 3,000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए थे, जिन्हें अब सड़क मार्ग से भेजा जा रहा है.
यह फैसला पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी एक वैधानिक नियामक आदेश (Statutory Regulatory Order) के बाद लिया गया, जो तीसरे देशों के सामान को पाकिस्तान के रास्ते ईरान पहुंचाने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है. इसमें कस्टम गारंटी के तहत माल ढुलाई की अनुमति दी गई है. पाकिस्तान ने जिन 6 जमीनी मार्गों को खोला है, वे इस प्रकार हैं...
ये मार्ग पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट और पोर्ट कासिम जैसे प्रमुख बंदरगाहों को ताफ्तान बॉर्डर क्रॉसिंग और गब्द जैसे बॉर्डर चेक पॉइंट से जोड़ते हैं, जिससे ईरान तक जमीनी पहुंच संभव होती है. बता दें कि पाकिस्तान और ईरान एक दूसरे के साथ 900 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करते हैं. यह व्यवस्था 2008 में पाकिस्तान-ईरान के बीच हुए अंतरराष्ट्रीय सड़क परिवहन समझौते पर आधारित है, जिसके तहत तीसरे देशों का माल ट्रकों के जरिए ईरान पहुंचाया जा सकता है और कस्टम गारंटी के जरिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है.
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अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल से होर्मुज में नाकेबंदी लागू की है. अमेरिका की इस कार्रवाई का मकसद ईरान के एक्सपोर्ट के साथ-साथ उसके इम्पोर्ट को भी सीमित करना है, ताकि तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके. डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहा है और नकदी की कमी से जूझ रहा है. ऐसे में पाकिस्तान के नए ट्रांजिट कॉरिडोर को समुद्री प्रतिबंधों के बीच ईरान के लिए एक ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ के तौर पर देखा जा रहा है. जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी में कानूनी तरीके से सेंध लगाने जैसा है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान का यह कदम उसकी खुद की आर्थिक जरूरतों और अमेरिकी प्रभाव के बीच ईरान के साथ रणनीतिक संतुलन साधने के लिए जरूरी है. इससे क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा, जबकि ग्वादर पोर्ट का उपयोग बढ़ने से चीन समर्थित परियोजनाओं को भी मजबूती मिलेगी. ईरान के लिए जब समुद्री रास्ते बाधित हैं, तब पाकिस्तान के ये जमीनी मार्ग कुछ हद तक आर्थिक राहत बनकर उभरे हैं.
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