पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बेटी राबिया इमरान और उनके पति अली इमरान यूसुफ को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में बेगुनाह करार देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है.
एंटी-करप्शन एस्टेब्लिशमेंट (ACE) ने सोमवार को एंटी-करप्शन कोर्ट को बताया कि राबिया इमरान और अली इमरान यूसुफ 'पंजाब साफ पानी कंपनी' भ्रष्टाचार मामले में शामिल नहीं पाए गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, राबिया और इमरान के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं है. ACE की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने पहली सुनवाई में ही दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि पिछले हफ्ते ही एक अदालत ने इस अरबों डॉलर के भ्रष्टाचार मामले में राबिया और उनके पति के खिलाफ जारी स्थायी गिरफ्तारी वारंट को सस्पेंड कर दिया था. ये वारंट साल 2022 में इमरान खान सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए थे.
राबिया गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने पति के साथ 2022 में ब्रिटेन फरार हो गई थीं. ऐसे में अदालत ने उन्हें अपराधी घोषित कर दिया था. अदालत से जमानत मिलने के बाद वो कुछ हफ्ते पहले ही ब्रिटेन से वापस लौटे हैं.
शहबाज और नवाज भी हो चुके हैं बरी
इस मामले में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नाम भी शामिल था, लेकिन सबूतों की कमी की वजह से उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका है. सत्तारूढ़ पीएमएल-एन के नेता और तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी भ्रष्टाचार के मामलों में बरी किया जा चुका है. इनमें अल-अजीजिया मामला भी शामिल है, जिसमें उन्हें लाहौर जेल में सात साल की सजा काटनी पड़ सकती थी.
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इमरान खान की पार्टी ने उठाए सवाल
इमरान खान की पार्टी PTI ने अदालत के इन फैसलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. पीटीआई का आरोप है कि प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों का बरी होना 'समझौतावादी न्यायपालिका' और 'नैब-पीएमएलएन सांठगांठ' का नतीजा है. पार्टी ने इन फैसलों को 'न्याय का अंत; बताया है. उन्होंने न्यायपालिका पर राज्य समर्थित राजनीतिक आतंकवाद का मूक साथी होने का आरोप लगाया है.
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