अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के नाम पर पाकिस्तान गेम खेल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ सीजफायर को लेकर लगातार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ कर रहे हैं लेकिन पाकिस्तान ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका है.
पाकिस्तान ने ईरान जाने वाले सामान के लिए ऐसा कानूनी रास्ता बना दिया है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को दरकिनार किया जा सके. ईरान के लिए पाकिस्तान के बनाए नए ढांचे के तहत 'ट्रांजिट ऑफ गुड्स थ्रू टेरिटरी ऑफ पाकिस्तान ऑर्डर 2026' के जरिए तय व्यापारिक कॉरिडोर को खोल दिया गया है.
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है. पाकिस्तान के इस फैसले से सामान जमीनी रास्ते से ईरान पहुंच सकेगा, जिससे ईरान को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशों को झटका लग सकता है.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शनिवार को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' के तहत 14 नए लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए. यह अमेरिका के 60 दिन के ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसका मकसद ईरान को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से काटना है.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता के दूसरे दौर के लिए विटकॉफ-कुशनर प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी. ट्रंप ने इसकी वजह ईरानी नेतृत्व के भीतर 'भारी अंदरूनी कलह और भ्रम' बताया.
उसी दिन इस्लामाबाद में पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने SRO 691(I)/2026 नोटिफिकेशन जारी किया. नोटिफिकेशन में बताया गया कि पाकिस्तान से सामान ईरान भेजने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है जिसके तहत अन्य देशों का सामान पहले पाकिस्तान आएगा फिर पाकिस्तान उसे सड़क के रास्ते ईरान भेजेगा. सामान पाकिस्तान के छह तय मार्गों से जमीनी रास्ते से ईरान पहुंचेगा और पाकिस्तान ने इसे तत्काल प्रभाव से इजाजत भी दे दी है.
पाकिस्तान के नए कदम से ईरान को बड़ी राहत
पाकिस्तान सरकार के इस नए आदेश से ईरान को बहुत राहत मिली है. कराची बंदरगाह पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ईरान जाने वाले करीब 3,000 कंटेनर फंसे हुए थे. लेकिन अब इनके ईरान जाने का रास्ता साफ हो गया है.
इस तरह पाकिस्तान ने एक तरफ अमेरिकी नाकेबंदी में कानूनी सेंध लगा दी, वहीं दूसरी तरफ उसी नाकेबंदी के दबाव पर आधारित युद्धविराम की कोशिशों में मध्यस्थ भी बना हुआ है. अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल लॉरेंस सेलिन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'पाकिस्तान ईरान को अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने में मदद कर रहा है.'
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान ही ऐसा देश है, जो एक ही समय में अमेरिका-ईरान युद्धविराम में मध्यस्थता कर सकता है, सऊदी अरब से ईरान को अलग-थलग करने के लिए आर्थिक सहयोग ले सकता है, इस्लामाबाद के सेरेना होटल में दोनों पक्षों की मेजबानी कर सकता है, और उसी हफ्ते अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच नाकेबंदी में कानूनी रास्ता भी खोल सकता है.
कहा जा रहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक तरफ बैक-चैनल कूटनीति संभाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी देखरेख में ही ईरान तक सामान ले जाने वाले कॉरिडोर्स भी खोले जा रहे हैं जो अमेरिकी दबाव को कमजोर करते हैं.
अब विस्तार से जानते हैं ईरान के लिए पाकिस्तान का प्लान क्या है?
पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी नॉटिफिकेशन में कहा गया है कि नए फ्रेमवर्क का मकसद द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है.
पाकिस्तानी अखबार 'द न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था के तहत सामान की आवाजाही के लिए छह तय ट्रांजिट मार्गों को मंजूरी दी गई है, जिससे पड़ोसी देश ईरान के साथ नए व्यापारिक रास्ते खुल गए हैं.
पाकिस्तान ने इन छह मार्गों को ट्रांजिट कॉरिडोर घोषित किया गया है:
1. ग्वादर - गब्द (पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर)
2. कराची/पोर्ट कासिम - लियारी- ओरमारा - पसनी - गब्द
3. कराची/पोर्ट कासिम - खुजदार - दलबंदीन - ताफ्तान (पाकिस्तान-ईरान बॉर्डर)
4. ग्वादर - तुर्बत - होशाब - पंजगुर - नाग - बेसिमा - खुजदार - क्वेटा/लकपास - दलबंदीन - नोकुंडी - ताफ्तान
5. ग्वादर - लियारी - खुजदार - क्वेटा/लकपास - दलबंदीन - नोकुंडी - ताफ्तान
6. कराची/पोर्ट कासिम - ग्वादर - गब्द
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