नेपाल ने कुछ दिन पहले कहा था कि वो भारत से आम नहीं मंगाएगा, क्योंकि उनमें बहुत ज़्यादा कीटनाशक मिले हैं. लेकिन अब नेपाल ने पूरी तरह पलटी मार ली है. नेपाल की सरकार ने अब साफ कह दिया कि भारतीय आमों पर कोई रोक नहीं है.
कुछ दिन पहले नेपाल के अधिकारियों ने कहा था कि भारत से आने वाले आमों में बहुत ज़्यादा कीटनाशक पाए गए हैं. साथ ही बॉर्डर के पास, खासकर मधेश प्रांत में, आमों की जांच करने की सुविधा भी नहीं थी. इस वजह से भारतीय आमों को रोक दिया गया था.
बॉर्डर पर क्या हुआ?
मधेश प्रांत में भित्तामोड़ नाम के एक चेकपोस्ट पर भारत से आम का एक बड़ा ट्रक रोका गया था. शक था कि फलों में हानिकारक कीड़े हो सकते हैं. लेकिन जब भारत की तरफ से एक सर्टिफिकेट मिला जिसमें लिखा था कि पौधे स्वस्थ हैं, तो वो ट्रक छोड़ दिया गया.
व्यापारी क्या कह रहे थे?
जनकपुरधाम के एक फल-सब्जी व्यापारी संघ के नेता भुवनेश्वर पुरबे ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर भारतीय आम नहीं आए, तो नेपाल में आम की कमी हो जाएगी. उनका कहना था कि जनकपुरधाम में हर रोज 50 टन से ज्यादा आम भारत के पड़ोसी जिलों से आते हैं, जो फिर काठमांडू और बाकी जगहों पर भेजे जाते हैं.
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अकेले नेपाल की अपनी खेती से यह मांग पूरी नहीं हो सकती. उन्होंने सरकार को सलाह दी थी कि बैन लगाने की बजाय जांच की सुविधा बेहतर की जाए, और फलों को सही तरीके से चेक करके अंदर आने दिया जाए.
नेपाल सरकार ने क्या कहा?
नेपाल के कृषि, वन और पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान जारी किया. इसमें साफ कहा गया कि भारत से आम मंगाने पर कोई रोक नहीं है. मंत्रालय के अंतर्गत 'प्लांट क्वारंटाइन और कीटनाशक प्रबंधन केंद्र' ने बताया कि उन्हें तब यह मुद्दा पता चला जब मीडिया और सोशल मीडिया पर खबरें आने लगीं. केंद्र ने कहा कि उन्होंने कोई बैन नहीं लगाया, बल्कि मांग के आधार पर आम के लिए परमिशन दी जा रही है.
जांच कैसे होगी?
नेपाल सरकार ने यह भी बताया कि कीड़े-मकोड़े वाले फल या पौधे अंदर न आएं, इसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. प्लांट क्वारंटाइन और संरक्षण कानून के तहत भारत से आने वाले आमों को 48 डिग्री सेल्सियस के गर्म पानी में एक घंटे तक रखा जाएगा, ताकि कोई हानिकारक कीड़ा न बचे.
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