ईरान के चारों ओर अमेरिका का घेरा, 50 हजार सैनिक टूट पड़ने को तैयार

मिडिल-ईस्ट में ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलाके में अब 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं.

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पेंटागन ने हाल में 2000 हजार पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजा. (File Photo: AFP) पेंटागन ने हाल में 2000 हजार पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजा. (File Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

ईरान जंग हर रोज एक नई करवट लेती हुई नजर आ रही है. तेहरान झुकने को तैयार नहीं है और अमेरिका से भी कोई उम्मीद नहीं नजर आ रही है. इसी बीच, मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तादाद 50 हजार के पार पहुंच गई है, जो आम दिनों के मुकाबले करीब 10 हजार ज्यादा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2500 मरीन और 2500 नाविकों के नए जत्थों के दाखिल होने से इलाके में अमेरिकी घेराबंदी मजबूत हुई है. किसी भी वक्त कुछ भी हो सकता है. राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ एक महीने से चल रहे युद्ध में अपने अगले कदम पर फैसला लेने वाले हैं. इनमें रणनीतिक द्वीपों पर कब्जे की योजना भी शामिल हो सकती है. 

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(File Photo: GettyImages)

अमेरिकी सेना के 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के 2000 पैराट्रूपर्स भी ईरान से हमला करने लायक दूरी के अंदर तैनात किए गए हैं. यह सैन्य जमावड़ा होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने और ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए किया गया है. 

हालांकि, मिलिट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान जैसे बड़े देश पर कब्जा करने के लिए 50 हजार सैनिकों की तादाद बहुत कम है. फिलहाल अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप सहित 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर चुके हैं.

होर्मुज़ जलमार्ग को खोलने की चुनौती

दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल जिस संकरे जलमार्ग से गुजरता है, वह ईरानी सेना के हमलों की वजह से काफी हद तक बंद हो गया है. ट्रंप प्रशासन इस रास्ते को फिर से सुरक्षित करने के लिए किसी द्वीप या जमीन के हिस्से पर कब्जे की कोशिश कर सकता है. 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के सैनिकों को इसी तरह के कठिन सामरिक ऑपरेशन्स के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति बहाल की जा सके.

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पेंटागन ने हाल ही में 2,000 पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजा है, जिनकी लोकेशन फिलहाल सीक्रेट रखी गई है. जानकारों का मानना है कि इन सैनिकों का इस्तेमाल उत्तरी फारसी खाड़ी में स्थित ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है. मरीन सैनिकों के साथ मिलकर ये पैराट्रूपर्स जमीन पर बड़े ऑपरेशन्स को अंजाम दे सकते हैं, जिससे ईरान की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके.

अभी तक कोई सीधी बातचीत नहीं

पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थों के ज़रिए बैकचैनल कोशिशों के बावजूद, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ये तैयारियां रूटीन का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा, "कमांडर-इन-चीफ़ को ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प देने के लिए तैयारियां करना पेंटागन का काम है. इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति ने कोई फ़ैसला ले लिया है." 

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