'जरूरी मदद जारी रखेंगे'... चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा हम ईरान की हेल्प करेंगे

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन ईरान के लिए जरूरी मदद जारी रखेगा. ईरान को चीन 2 लाख डॉलर देने जा रहा है. यह राशि चीन रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से ईरान रेड क्रिसेंट को दी जाएगी. 

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चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान को जरूरी सहयोग जारी रहेगा. (Photo: AP) चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान को जरूरी सहयोग जारी रहेगा. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:27 PM IST

मिडिल ईस्ट में युद्ध को आज 14 दिन हो चुके हैं और हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. जंग का असर वैश्विक स्तर पर साफ दिख रहा है. इस बीच चीन ने ईरान की मदद के लिए 2 लाख डॉलर देने का ऐलान किया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह राशि चीन रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से ईरान रेड क्रिसेंट को दी जाएगी. 

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चीन ने कहा है कि मानवता की भावना के तहत ईरान को जरूरी सहयोग जारी रहेगा, ताकि वहां के लोगों को कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद मिल सके.

युद्ध का तेल पर असर

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली तेल और गैस की आपूर्ति पर काफी असर पड़ा है. अमेरिकी और इजरायली हमलों के साथ ईरान की कड़ी निगरानी और सैन्य गतिविधियों ने इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है.

इस स्थिति को देखते हुए, अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर 30 दिन के लिए प्रतिबंधों से छूट जारी की है. इसका मकसद युद्ध से प्रभावित वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करना बताया गया है. इस छूट के बाद शुक्रवार सुबह एशिया में तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है. 

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यह भी पढ़ें: इजरायली बमबारी से कांपा लेबनान, पेड़-पौधे-मकान सब तबाह... देखें Ground Report

क्लस्टर बमों से हमला कर रहा ईरान

ईरान जंग में खतरनाक क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं. ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइलों में छोटे-छोटे क्लस्टर बम शामिल कर रहा है. ये विशेष बम ऊंचाई से छोड़े जाने पर 11 से 13 किलोमीटर तक फैलकर हमला करने की क्षमता रखते हैं.

वहीं लेबनान में भी हवाई हमले जारी है. इजरायल के हमलो के चलते लेबनान कांप रहा है. सबसे अधिक तबाही दक्षिणी लेबनान में देखने को मिली है, जहां बमबारी के कारण घरों के आसपास की जमीन, पेड़-पौधों और स्थानीय ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है.

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