मिडिल ईस्ट में मचे इस भीषण युद्ध को 7 दिन पूरे हो चुके हैं और इन 168 घंटों ने पूरी दुनिया को भारी चिंता में डाल दिया है. 28 फरवरी को जब यह संघर्ष शुरू हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि महज एक हफ्ते के भीतर यह 14 देशों तक फैल जाएगा. एक तरफ जहां अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और इजरायल के 'रोरिंग लायन' अभियान के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों की बौछार की.
सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मौत की खबरों से लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी तक, इस एक हफ्ते ने दुनिया का नक्शा और समीकरण दोनों बदल दिए हैं. आसमान में आधुनिक फाइटर जेट्स के बीच सीधी भिड़ंत हो रही है, तो समंदर में युद्धपोत डूब रहे हैं. तबाही का आलम यह है कि 14 देश अब इस जंग का मैदान बन चुके हैं और हर बीतते दिन के साथ खतरा और गहरा होता जा रहा है. आखिर इन 7 दिनों के भीतर क्या-क्या हुआ और अब हालात किस मोड़ पर हैं? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं.
जंग का पहला दिन
जंग की शुरुआत अमेरिका और इजरायल के एक बेहद सटीक और साझा हमले से हुई. अमेरिका ने इसे 'एपिक फ्यूरी' कहा, तो इजरायल ने इसे 'रोरिंग लायन' नाम दिया. इस हमले में 100 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. टार्गेट बिल्कुल साफ था ईरान की सरकारी इमारतें, राष्ट्रपति का घर और सुप्रीम लीडर का दफ्तर. देखते ही देखते खबर आई कि ईरान के सबसे बड़े नेता आयतुल्ला अली खामेनेई इस हमले में मारे गए हैं.
ईरान ने भी एक घंटे के भीतर ही जोरदार जवाब दिया. ईरान की सेना ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोला. इस कार्रवाई की रेंज में दुबई के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल भी रहे, जिन्हें निशाना बनाया गया था. इसी दौरान ईरान के मीनाब इलाके में एक प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 165 मासूम लड़कियों की जान चली गई. इसे इस संघर्ष की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी माना जा रहा है.
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जंग का दूसरा दिन
जंग के दूसरे दिन संघर्ष की आग और भी ज्यादा भड़क उठी. अमेरिका ने ईरान की नौसेना पर इतना जोरदार हमला किया कि उसके नौ जहाज समंदर में डूब गए. यही नहीं, ईरान की सबसे ताकतवर मिलिट्री यूनिट 'IRGC' के हेडक्वार्टर को भी मलबे में तब्दील कर दिया गया. पलटवार करते हुए ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकाने पर ड्रोन गिराए, जिसमें छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई.
लेकिन इसी दौरान ईरान के अंदर से दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं. खामेनेई की मौत ने देश के लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया था. तेहरान में जहां लोग काले कपड़े पहनकर मातम मना रहे थे, वहीं करज में लोग अपनी गाड़ियां लेकर सड़कों पर उतर आए थे और हॉर्न बजाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे.
इसी दिन अमेरिका ने अपने सबसे घातक बी-2 बमवर्षक विमानों को मैदान में उतारा और ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों पर 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बम बरसाए. खबर आई कि इस भीषण हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और 40 कमांडर मारे गए हैं.
जंग का तीसरा दिन
जंग के तीसरे दिन तक यह लड़ाई सिर्फ दो-तीन देशों के बीच नहीं रह गई थी, बल्कि धीरे-धीरे इसमें कुल 12 देश शामिल हो चुके थे. जैसे-जैसे समय बीत रहा था, युद्ध का मैदान और बड़ा होता जा रहा था. लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह ने मोर्चा खोलते हुए इजरायल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं. इजरायल ने भी इसका करारा जवाब दिया और बेरूत पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें 31 लोगों की जान चली गई. तनाव इतना बढ़ गया कि पूरे मिडिल ईस्ट में सिर्फ धुएं का गुबार और सायरन की आवाजें सुनाई दे रही थीं.
इसी बीच ईरान ने एक ऐसी चाल चली जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी. ईरान ने दुनिया की दुखती रग यानी तेल सप्लाई पर सीधा वार किया और सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी को निशाना बनाया. इस हमले का मकसद साफ था दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डालना. इसी अफरातफरी और भारी तनाव के बीच कुवैत से भी एक बड़ी खबर आई, जहां अमेरिका के तीन लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी या आपसी टक्कर की वजह से क्रैश हो गए. अमेरिकी प्रशासन ने बाद में इसे 'फ्रेंडली फायर' यानी अपनी ही चूक से हुआ हादसा करार दिया.
अब इस युद्ध का दायरा इतना फैल चुका था कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के अलावा इराक, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, यूएई, यमन, लेबनान, तुर्की और अजरबैजान जैसे देश भी इसकी तपिश महसूस कर रहे थे. जिस तरह से एक के बाद एक देश इस संघर्ष में खिंचे चले आ रहे थे, उसे देखकर पूरी दुनिया में यह डर बैठ गया कि कहीं यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट तो नहीं है.
जंग का चौथा दिन
जंग के चौथे दिन ईरान ने वो कदम उठा लिया जिसका डर पूरी दुनिया को सता रहा था. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने का एलान कर दिया. आपको बता दें कि यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. ईरान के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मचा दी और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर हर तरफ हाहाकार मच गया. ईरान यहीं नहीं रुका, उसने रियाद और कुवैत में मौजूद अमेरिकी दूतावासों पर ड्रोन से हमले कर दिए, जिससे वहां कामकाज पूरी तरह ठप हो गया और डिप्लोमैटिक हलकों में सन्नाटा पसर गया.
इधर युद्ध के मैदान में इजरायल ने अपनी नई और घातक तकनीक 'आयरन बीम' का पहली बार इस्तेमाल किया. यह एक आधुनिक लेजर डिफेंस सिस्टम है, जिसने हिज्बुल्लाह की तरफ से दागे गए रॉकेटों को पलक झपकते ही हवा में जलाकर राख कर दिया. इजरायल की इस मारक क्षमता ने दुनिया को हैरान कर दिया.
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया कि फिलहाल किसी भी तरह के समझौते या युद्धविराम की कोई गुंजाइश नहीं है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि यह जंग अभी थमने वाली नहीं है और यह 5 हफ्ते से भी ज्यादा खिंच सकती है. भारत जैसे देशों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं थी, क्योंकि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने का सीधा मतलब था देश में पेट्रोल और डीजल के दामों का आसमान पर पहुंच जाना.
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जंग का पांचवां दिन
जंग के पांचवें दिन लड़ाई का दायरा सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हिंद महासागर और यूरोप की दहलीज तक जा पहुंचा. युद्ध में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब तुर्की की ओर बढ़ रही एक ईरानी मिसाइल को नाटो (NATO) के एयर डिफेंस सिस्टम ने बीच हवा में ही मार गिराया. नाटो के इस सीधे दखल ने पूरी दुनिया को चौंका दिया और यह साफ कर दिया कि अब यह जंग और भी बड़े स्तर पर फैल सकती है.
उधर, हिंद महासागर के गहरे पानी में एक और खौफनाक मंजर देखने को मिला. यहां एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के शक्तिशाली युद्धपोत 'IRIS Dena' को टॉरपीडो से निशाना बनाया और उसे समंदर में डुबो दिया. सबसे दुखद बात यह रही कि यह ईरानी जहाज भारत में एक नौसैनिक अभ्यास पूरा करके वापस लौट रहा था. इस अचानक हुए हमले में 87 ईरानी नाविकों की जान चली गई, जिससे हड़कंप मच गया.
इधर, इजरायली वायुसेना ने भी अपने तेवर और कड़े कर लिए. इजरायल ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से अब तक वे ईरान पर 5,000 से ज्यादा बम बरसा चुके हैं, जिससे ईरान के कई ठिकाने तबाह हो गए हैं. हालात इतने बिगड़ते देख, कई यूरोपीय देशों ने अपनी सुरक्षा को लेकर अपनी सेनाएं और जंगी जहाज मिडिल ईस्ट की ओर रवाना करना शुरू कर दिया. माहौल ऐसा बन चुका था कि पूरा इलाका मानो एक बारूद के ढेर पर बैठा हो, बस एक छोटी सी चिंगारी ही इसे पूरी तबाही में बदलने के लिए काफी थी.
जंग का छठा दिन
जंग के छठे दिन आसमान में वो मंजर दिखा जो आमतौर पर सिर्फ फिल्मों में देखने को मिलता है. तेहरान के ठीक ऊपर दो आधुनिक लड़ाकू विमानों के बीच आमने-सामने की भिड़ंत हुई, जिसे सैन्य भाषा में 'डॉगफाइट' कहा जाता है. इजरायल के सबसे एडवांस्ड F-35 विमान ने ईरान के Su-35 को हवा में ही ढेर कर दिया. यह ईरान के लिए एक बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि उसके तकनीक को चुनौती मिली थी.
इसी दिन इस महाजंग की आग अजरबैजान तक भी पहुंच गई. वहां के एक हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले में चार लोग घायल हो गए, जिससे काकेशस क्षेत्र में भी तनाव चरम पर पहुंच गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का असर भी अब साफ़ दिखने लगा था, जिसके चलते समंदर में तेल टैंकरों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक गिर गई थी. इसका नतीजा यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बेकाबू होने लगे और पूरी दुनिया में महंगाई का डर सताने लगा.
इधर, इजरायल ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब ईरान के अंदरूनी सुरक्षा बल 'बसीज' के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. ईरान के पवित्र शहर कौम में भी भारी बमबारी की खबरें आईं. आपको बता दें कि यह शहर ईरान के बड़े नेताओं और मौलवियों का मुख्य केंद्र है. इजरायली हमलों का सीधा मकसद ईरान के नेतृत्व को पूरी तरह बेअसर बनाना था, ताकि वे आगे की कोई बड़ी जवाबी रणनीति न तैयार कर सकें और उनका कमांड सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाए.
जंग का सातवां दिन
आज यानी जंग के सातवें दिन भी तबाही की रफ्तार थमी नहीं है. इजरायल ने तेहरान और लेबनान के रिहायशी इलाकों में दोबारा बड़े हमले शुरू किए हैं, तो ईरान ने भी तेल अवीव को निशाना बनाकर ड्रोन दागे हैं. लेकिन सबसे बड़ी खबर आई वाशिंगटन से, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियार बनाने वाली बड़ी कंपनियों के साथ मीटिंग की और ईरान को खुली चेतावनी दे दी. ट्रंप ने दो-टूक कहा, "अब ईरान के साथ कोई बातचीत या नई डील नहीं होगी. अगर बचना है, तो बिना शर्त सरेंडर करना होगा." उन्होंने यह भी कहा कि वो ईरान की अर्थव्यवस्था को सुधार देंगे, लेकिन पहले उसे घुटने टेकने होंगे.
28 फरवरी से शुरू हुई ये जंग अब 14 देशों के भविष्य को दांव पर लगा चुकी है. भले ही आज मिसाइलों की संख्या थोड़ी कम हुई हो, लेकिन तनाव इतना ज्यादा है कि कोई भी नहीं जानता कि अगली सुबह शांति लेकर आएगी या और बड़ी तबाही.
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