बाउंस हो गया पाकिस्तान का 5 अरब का चेक, ठेकेदारों ने रोके CPEC के प्रोजेक्ट

पाकिस्तान नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचए) पर छाए वित्तीय संकट की वजह से 52 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की कई सड़क परियोजनाओं का काम खटाई में पड़ गया है. पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कुछ दिनों पहले पांच अरब रुपये के चेक बाउंस होने के बाद ठेकेदारों ने कई सीपीईसी परियोजनाओं का काम बंद कर दिया है.

Advertisement
पाकिस्तान में निर्माणाधीन सीपीईसी (Getty) पाकिस्तान में निर्माणाधीन सीपीईसी (Getty)

विवेक पाठक

  • इस्लामाबाद,
  • 23 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

पाकिस्तान नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचए) पर छाए वित्तीय संकट की वजह से 52 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की कई सड़क परियोजनाओं का काम खटाई में पड़ गया है. पाकिस्तानी अखबार डॉन मे छपी एक रिपोर्ट मे सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कुछ दिनों पहले पांच अरब रुपये के चेक बाउंस होने के बाद ठेकेदारों ने कई सीपीईसी परियोजनाओं का काम बंद कर दिया है.

Advertisement

प्रभावित परियोजनाओं में सीपीईसी का हक्ला-डेरा इस्माइल खान वेस्टर्न रूट और कराची-लाहौर मोटरवे शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा हालात में न सिर्फ सीपीईसी परियोजनाएं बल्कि निर्माण से संबंधित स्थानीय उद्योग, इंजीनियरों व मजदूरों पर भी प्रभाव पड़ा है.

सरकार से संपर्क करने पर एनएचए के प्रवक्ता काशिफ जमान ने कहा कि अथॉरिटी ने कंपनियों को पांच अरब रुपये का चेक 29 जून को जारी किया था. काशिफ जमान का कहना है कि 1.5 अरब रुपये के चेक का भुगतान उसी दिन हो गया और 'बाकी चेक दूसरे दिन जमा किए गए जिनका भुगतान नहीं हो पाया.' उन्होंने कहा कि मामले को सरकार के समक्ष रखा गया है और जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा.

एनएचए के प्रवक्ता के अनुसार ज्यादातर परियोजनाओं को दिसम्बर 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन जानकारों की मानें तो भुगतान में देरी होने की वजह से सीपीईसी की कई परियोजनाओं के पूरा होने और देर लग सकती है.

Advertisement

गौरतलब है कि चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) की प्रमुख परियोजना में से एक है. यह चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ेगी, जिससे चीन की पहुंच अरब सागर तक हो जाएगी. यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरती है, जिसकी वजह से भारत इसका विरोध करता रहा है.

पिछले साल बीजिंग में वन बेल्ट वन रोड शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें अमेरिका और जापान समेत कई एशियाई देशों ने हिस्सा लिया था. लेकिन भारत ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का हवाला देते हुए इस शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »