इजरायल और लेबनान ने मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में हालिया संघर्ष का कूटनीतिक समाधान निकालने के लिए मंगलवार को वार्ता हुई. अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देश दशकों बाद आमने-सामने की वार्ता में शामिल हुए हैं. इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच एक महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध के बीच दोनों देशों द्वारा उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण लेकिन अनिश्चित कदम है. हालांकि, हिज्बुल्लाह ने इस वार्ता को पूरी तरह खारिज कर दिया है और वह इसका हिस्सा नहीं है.
हिज्बुल्लाह को निशाना बनाकर किए गए इजरायल के हमलों में लेबनान को काफी नुकसान हुआ है, खासकर राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान में. इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद इस वार्ता में अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इजरायल-लेबनान वार्ता में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक मौका है, लेकिन तुरंत सब समस्याएं हल नहीं होंगी.
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रुबियो ने उम्मीद जताई कि दोनों देश दशकों बाद सीधी वार्ता कर रहे हैं और इससे कुछ सकारात्मक समाधान की ओर बढ़ने में जरूर मदद मिलेगी. यह 1993 के बाद दोनों के बीच पहली वार्ता है, जो दशकों से एक दूसरे के खिलाफ युद्ध की स्थिति में रहे हैं. ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष ने लेबनान में गहरे घाव छोड़े हैं और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है. हिज्बुल्लाह के नेता वाकिफ सफा ने न्यूज एजेंसी 'द एसोसिएटेड प्रेस' से कहा कि हम वॉशिंगटन में हुए किसी भी समझौते को नहीं मानेंगे.
हिज्बुल्लाह के इस स्टैंड के कारण इजरायल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन में चल रही वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष का लेबनान की राजधानी बेरूत और देश के दक्षिणी हिस्से में बहुत गंभीर असर पड़ा है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इजरायली हमलों में कम से कम 2,089 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 252 महिलाएं, 166 बच्चे और 88 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं, जबकि 6,700 से अधिक लोग घायल हुए हैं. अब तक एक मिलियन (10 लाख) से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं.
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