Ground Report: ईरान-इजरायल जंग में 'क्लस्टर बम' की एंट्री, यरुशलम में हो रही है बारूद की बारिश

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध लगातार और खतरनाक होता जा रहा है. ईरान अब क्लस्टर बम वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले कर रहा है, जबकि इजरायल अपने मजबूत एंटी-मिसाइल सिस्टम से जवाब दे रहा है. मिसाइलों, सायरन और बम शेल्टरों के बीच भी इजरायल में सामान्य जीवन की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं.

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जंग के बीच सायरन, बम शेल्टर और मिसाइलें, ईरान-इजरायल टकराव और खतरनाक हुआ. (Photo: ITG/Reuters) जंग के बीच सायरन, बम शेल्टर और मिसाइलें, ईरान-इजरायल टकराव और खतरनाक हुआ. (Photo: ITG/Reuters)

श्वेता सिंह

  • तेल अवीव,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:17 PM IST

ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग लगातार भड़कती जा रही है. दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला जारी है और आसमान से मिसाइलों और बमों की बारिश हो रही है. इजरायल और अमेरिका की बमबारी में ईरान के कई तेल डिपो तबाह हो चुके हैं. तेहरान का आसमान और जमीन धुएं से काली होती दिखाई दे रही है. ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है. इजरायल पर हमले जारी रखे हुए है.

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ईरान ने क्लस्टर बमों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ईरान अब क्लस्टर बम वाली बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है. रविवार सुबह ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलें यरुशलम इलाके के ऊपर उड़ती दिखाई दीं और उनसे कई छोटे-छोटे बम गिरते देखे गए, जो कि क्लस्टर बम थे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन मिसाइलों में कार्गो वॉरहेड लगा होता है, जिससे एक ही मिसाइल से छोटे-छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिरते हैं.

क्लस्टर बमों को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है. कई देशों और संगठनों ने इन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. बैन के समर्थकों का कहना है कि ये बम बिना सोचे-समझे बड़े इलाके में गिरते हैं और युद्ध खत्म होने के लंबे समय बाद तक भी आम नागरिकों के लिए खतरा बने रहते हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि युद्धों में पहले भी क्लस्टर बमों का इस्तेमाल होता रहा है. 

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इजरायल ने खुद लेबनान में पिछले युद्धों के दौरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया था. रूस और सीरिया समेत कई दूसरे देशों ने भी इन हथियारों का इस्तेमाल किया है. अमेरिका ने आखिरी बार 2003 में इराक में इनका इस्तेमाल किया था. अमेरिका अभी भी इन्हें अपने हथियारों के जखीरे में रखता है और क्लस्टर बमों पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन का हिस्सा नहीं बना है.

रविवार को उत्तरी तेल अवीव में भी हमलों के बाद नुकसान की खबरें सामने आईं. सवाल उठ रहा है कि बैलिस्टिक मिसाइलों और क्लस्टर बमों के कारण इतनी क्षति हुई या फिर आसमान में हुए इंटरसेप्शन के मलबे से नुकसान हुआ. सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में भी ऐसी ही तस्वीरें देखने को मिली हैं. ईरान की मिसाइल क्षमता को देखते हुए पूरे इलाके में हाई अलर्ट की स्थिति बनी हुई है.

ईरान के हमलों में इजरायल को भी नुकसान उठाना पड़ा है. ईरान के मिसाइल अटैक में इजरायल में आज एक व्यक्ति की मौत हुई है. यह मौत सेंट्रल इजरायल के इलाके में हुई. इजरायल का कहना है कि इस युद्ध में अब तक उसके 11 लोगों की जान जा चुकी है. इजरायल के एंटी-ड्रोन और एंटी-मिसाइल सिस्टम को दुनिया के सबसे मजबूत सिस्टम में गिना जाता है. ये सिस्टम मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर देते हैं. 

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लेकिन ईरान लगातार बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है. ऐसे में कुछ मिसाइलें इजरायल तक पहुंच ही जाती हैं. इजरायल ने इस खतरे से निपटने के लिए व्यापक व्यवस्था कर रखी है. जैसे ही ईरान की तरफ से कोई मिसाइल दागी जाती है, पूरे इलाके में तुरंत सायरन बजने लगते हैं. सायरन बजते ही लोग तुरंत सुरक्षित ठिकानों और बम शेल्टर की ओर बढ़ जाते हैं.

हाइफा से सामने आई तस्वीरों में भी यही दृश्य दिखाई देता है. यहां ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को इजरायल के इंटरसेप्टर निशाना बनाते नजर आते हैं. इसी दौरान पूरे शहर में सायरन बजने लगते हैं और लोग सुरक्षित जगहों की ओर बढ़ जाते हैं. इजरायल के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट को इस समय ज्यादा टारगेट किया जा रहा है. तेल अवीव से रिपोर्ट आई हैं कि वहां बम शेल्टरों की कमी नहीं है. 

करीब हर 200 मीटर की दूरी पर बम शेल्टर बने हुए हैं. जैसे ही सायरन बजता है, लोग तुरंत इन शेल्टरों में पहुंच जाते हैं. ईरान की जो मिसाइलें इजरायल की जमीन पर गिरती हैं, उनसे सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं. वैसे ज्यादातर मिसाइलों को इजरायल पहले ही हवा में इंटरसेप्ट कर देता है, इसलिए बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हो रहा. दिलचस्प बात यह है कि हमलों के बावजूद इजरायल में जिंदगी सामान्य है.

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इजरायल में लोग अपने कामकाज में लगे हुए हैं और सामान्य गतिविधियां भी दिखाई दे रही हैं. कई जगहों पर लोग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे पार्क करके सायरन बजते ही बम शेल्टर में जाना बेहतर समझते हैं. तेल अवीव के आसपास कई विदेशी दूतावास भी स्थित हैं. इन इलाकों में भी सतर्कता जरूर दिखाई देती है, लेकिन डर का माहौल नहीं है. इजरायल ने अपना एयरपोर्ट भी खोल दिया है.

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