PAK में उतरे अमेरिकी विमान, शहबाज-मुनीर के लिए ताजा हुआ ऑपरेशन सिंदूर का जख्म!

आजतक ने कम से कम चार C-17 ग्लोबमास्टर और एक C-40 क्लिपर को पाक वायुसेना के बेस नूर खानपर उतरते हुए देखा. यह वही नूर खान एयर बेस है जिसे पिछले मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने निशाना बनाया था. भारत के हमले में इसे इतना गंभीर नुकसान पहुंचा था कि वह महीनों तक काम नहीं कर पाया था.

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पाकिस्तान के आसमान में C-17 विमान देखे गए हैं. (Photo: ITG) पाकिस्तान के आसमान में C-17 विमान देखे गए हैं. (Photo: ITG)

बिदिशा साहा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:25 PM IST

इस्लामाबाद वार्ता कुछ ही घंटे में शुरू होने वाली है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति पाकिस्तान के लिए प्रस्थान कर चुके हैं. इस बीच पाकिस्तान के एयरस्पेस में  ताजा गतिविधियां अमेरिकी वीवीआईपी के आगमन से जुड़ी तैयारियों की ओर इशारा करती हैं. जेडी वेंस इस यात्रा की अगुआई करेंगे, इनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे. 

दूसरी ओर ईरान ने अभी तक पूरी तरह से प्रतिबद्धता नहीं जताई है; उसका कहना है कि किसी भी तरह की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि इज़राइल लेबनान में अपना हमला रोक दे. 

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आज तक की ओपेन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने पिछले 24 घंटों के दौरान फ़्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र पर नजर रखी, ताकि अमेरिकी विमानों की आवाजाही के पैमाने और पैटर्न का आकलन किया जा सके. इस निगरानी में इस्लामाबाद के साथ-साथ देश के अन्य हिस्से भी शामिल थे. 

इस दौरान कम से कम चार C-17 ग्लोबमास्टर और एक C-40 क्लिपर को पाकिस्तान के चकलाल में स्थित नूर खान एयरबेस पर उतरते देखा गया. 

छह C-17 ट्रांसपोर्ट विमान देखे गए हैं, जबकि इंडिया टुडे ने उनमें से कम से कम चार को ट्रैक किया है.

यह उन हवाई अड्डों में से एक था जिसे पिछले मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत ने निशाना बनाया था. भारत के अटैक में नूर खान एयरबेस इस कदर चौपट हुआ था कि यहां महीनों तक उड़ान की सेवा ठप रही थी. 

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर सटीक हमला किया. 7 से 10 मई की सुबह हुए इस अटैक में भारत ने मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया. 

नूर खान एयर बेस हमले से एयरबेस के ऑपरेशंस रूम, हैंगर, ईंधन ट्रक, मोबाइल मिशन कंट्रोल सेंटर और TB-2 ड्रोन हैंगरों को नुकसान पहुंचा.  एक IL-78 एयर टैंकर भी क्षतिग्रस्त हुआ. इसके अलावा रनवे पर एक बड़ा गड्ढा बन गया. इसकी वजह से एयरबेस लंबे समय के लिए ठप हो गया. 

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले बोइंग C-40 क्लिपर इस्लामाबाद पहुंचा.

इंडिया टुडे को निगरानी में पता चला है कि ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस ) से जुड़ा एक विमान भी इस्लामाबाद-रावलपिंडी हवाई क्षेत्र के ऊपर मंडराता हुआ देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यहां लॉजिस्टिक्स से जुड़े विमान आए हैं और रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी हो रही है.  

इन विमानों का क्या महत्व है?

बड़े बड़े एयरलिफ्ट और सर्विलांस विमान का यह मेल बताता है कि अमेरिका विदेशों में होने वाली उच्च स्तरीय यात्राओं की तैयारी कैसे करता है. अमेरिका की ये तैयारी बताती है कि ऐसी हाई प्रोफाइल इवेंट के लिए अमेरिका एक बहु-स्तरीय एप्रोच को दर्शाता है, जिसमें लॉजिस्टिक्स, वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही और वीआईपी मूवमेंट को पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाता है; खासकर तब जब संवेदनशील कूटनीतिक वार्ताओं का मसला हो. 

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C-17 ग्लोबमास्टर III, अमेरिकी नेतृत्व की उच्च-स्तरीय यात्राओं के लिए लॉजिस्टिकल बैकबोन का काम करता है. PAF बेस पर कम से कम चार RCH-टैग वाले विमानों, जिनमें RCH3267, RCH5001, RCH3244 और RCH4537 शामिल हैं, का आना उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद की महत्वपूर्ण यात्रा के लिए अमेरिका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप है. 

यात्रा से पहले तैनात किया गया यह भारी एयरलिफ्टर विमान संवेदनशील माहौल में उच्च-स्तरीय यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक विशेष वाहनों और महत्वपूर्ण उपकरणों को पहुंचाता है. 

1.5 मिलियन डॉलर की कैडिलैक वन राष्ट्रपति के लिए आरक्षित है, वहीं उपराष्ट्रपति भी वैसी ही बख्तरबंद और भारी सुरक्षा वाली एक लिमोज़ीन का उपयोग करते हैं. इसे अक्सर 'बीस्ट' कार कहा जाता है. 

US Air Force के आधिकारिक बयान के अनुसार, C-17 में सामान रखने की भरपूर जगह होती है. इस वजह से ये विमान इन 9-टन के बख्तरबंद वाहनों को ले जाने की अनोखी क्षमता रखता है; इस कार्गो बे की लंबाई 88 फीट, चौड़ाई 18 फीट और ऊंचाई 12 फीट से ज़्यादा है. यह 
विमान 170,900 पाउंड का अधिकतम पेलोड लेकर उड़ सकता है और 3500 फीट जितनी छोटी रनवे से भी उड़ान भरने में सक्षम है. इस वजह से यह विमान अमेरिका के मिलिट्री एसेट्स की सीधी और तुरंत तैनाती को संभव बनाता है.

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वीवीआईपी के मुख्य काफिले के अलावा, C-17 कई तरह के सहायक साजो-सामान भी ले जा सकता है. इनमें 102 पैराट्रूपर्स या साइड-वॉल सीटिंग में 134 यात्री शामिल हैं; साथ ही यह CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर, तीन स्ट्राइकर बख्तरबंद गाड़ियां, या M1 अब्राम्स जैसे भारी युद्धक टैंक भी ले जा सकता है. जिससे मौके पर ही व्यापक सैन्य और चिकित्सा सहायता देने की क्षमता सुनिश्चित होती है. 

उच्चस्तरीय दौरों से पहले ISR प्लेटफ़ॉर्म ने इस्लामाबाद-रावलपिंडी कॉरिडोर पर निगरानी बढ़ा दी है.

अमेरिकी सैन्य खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) विमान का कॉलसाइन SPHYR28 है, इसे 10 अप्रैल, 2026 को इस्लामाबाद-रावलपिंडी गलियारे के ऊपर ट्रैक किया गया था. ये विमान अमेरिका के लिए आसमान में आंख का काम करता है. अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इन्फ्रारेड सेंसर और सिग्नल इंटेलिजेंस उपकरणों का उपयोग करके, यह विमान राजनयिक इमारतों और यात्रा मार्गों के आसपास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी करते हुए रियल टाइम इनपुट प्रदान करता है. 

फ़्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म से मिले पाथ ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि यह विमान किसी ट्रांज़िट रूट पर चलने के बजाय उस इलाके के ऊपर बार-बार चक्कर लगाते हुए एक स्थिर ऊंचाई बनाए हुए है. यह पैटर्न जेडी वेंस के डेलिगेशन के आगमन से पहले निगरानी और लगातार कवरेज का संकेत दे रहा है. 

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'एयरफोर्स टू' से इस्लामाबाद के निकले जेडी वेंस 

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए. पाकिस्तान जाते समय 'एयर फ़ोर्स टू' में सवार होते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "हम बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह सकारात्मक रहेगी. जाहिर है, हम देखेंगे कि आगे क्या होता है."

उन्होंने ट्रंप का ज़िक्र करते हुए कहा, "अगर ईरानी सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम भी निश्चित रूप से दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं." लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा, "अगर वे हमारे साथ 'खेल' खेलने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी बातचीत करने वाली टीम इतनी नरम नहीं है."

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