होर्मुज के खौफ के बीच सऊदी अरब ने खोज लिया तेल सप्लाई का नया तरीका... जुटाने लगा तेल टैंकर

मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में संकट के बीच सऊदी अरब ने तेल निर्यात बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी बहरी (Bahri) ने ऊंची दरों पर कई बड़े टैंकर किराए पर लिए हैं, ताकि लाल सागर के रास्ते तेल भेजकर होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके.

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सऊदी अरब के पास होर्मुज के अलावा रेड सी तेल सप्लाई के लिए खुला है. (Photo- ITG) सऊदी अरब के पास होर्मुज के अलावा रेड सी तेल सप्लाई के लिए खुला है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. होर्मुज स्ट्रेट में संकट के कारण सऊदी अरब ने अपने कच्चे तेल के निर्यात को जारी रखने के लिए नई रणनीति अपनाई है. इसके तहत देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी बहरी (Bahri) ने बड़ी संख्या में तेल टैंकर किराए पर लेने शुरू कर दिए हैं.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने हाल के दिनों में कम से कम छह बड़े क्रूड ऑयल टैंकर बुक किए हैं. इन जहाजों का इस्तेमाल सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाह यानबू (Yanbu) से कच्चा तेल उठाकर दूसरे बाजारों तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा. समुद्री व्यापार से जुड़े जानकार का कहना है कि टैंकरों की यह खरीद इससे भी बड़ी हो सकती है और आने वाले दिनों में और सौदे सामने आ सकते हैं.

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दरअसल युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यही कारण है कि सऊदी अरब अब अपने तेल निर्यात को देश के भीतर मौजूद पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तक पहुंचाकर वहां से जहाजों के माध्यम से भेजने की कोशिश कर रहा है.

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दुनिया का 20% तेल होर्मुज स्ट्रेट के सहारे

यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है. आम तौर पर यहां से दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है लेकिन युद्ध के कारण इस मार्ग में बाधा आने से तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. इस सप्ताह कई बार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि तेल टैंकरों के किराए की दरें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं.

बताया जा रहा है कि बहरी कंपनी ने जिन टैंकरों को किराए पर लिया है, उनके लिए लगभग 450 वर्ल्डस्केल प्वाइंट की दर तय हुई है. इसका मतलब है कि एक टैंकर का किराया 4.5 लाख डॉलर प्रतिदिन से भी ज्यादा बैठ रहा है. युद्ध से पहले तेल टैंकर उद्योग में किराए की अधिकतम दर करीब 3 लाख डॉलर प्रतिदिन तक ही पहुंची थी. ऐसे में मौजूदा दरें ऐतिहासिक स्तर पर मानी जा रही हैं.

जहाजों का बेड़ा सऊदी के यानबू बंदरगाह रवाना

ब्लूमबर्ग के जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक सिंगापुर से लेकर लाल सागर तक तेल टैंकरों का एक बड़ा बेड़ा पहले ही यानबू बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है. इस बेड़े में कम से कम 24 जहाज शामिल बताए जा रहे हैं, हालांकि इनमें से सभी जहाजों को किस कंपनी ने किराए पर लिया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरामको के प्रमुख ने भी संकेत दिया है कि देश के भीतर तेल ले जाने वाली एक बड़ी पाइपलाइन को जल्द ही पूरी क्षमता पर चलाया जाएगा. यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के तट से जोड़ती है.

20 लाख बैरल प्रतिदिन घरेलू रिफाइनरियों में भेजा जाएगा

इस पाइपलाइन की क्षमता लगभग 70 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सप्लाई की है. हालांकि इसमें से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल सऊदी अरब के घरेलू रिफाइनरियों को भी भेजा जाएगा. इसका मतलब है कि लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात बढ़ाने से सऊदी अरब को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से होर्मुज स्ट्रेट की भरपाई नहीं कर पाएगा.

अगर क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है. ऐसे में सऊदी अरब की यह रणनीति तेल आपूर्ति बनाए रखने की एक अहम कोशिश मानी जा रही है.

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