चीन-PAK के फॉर्मूले पर बनेगी बात? ईरान जंग पर ट्रंप कल सुबह 6.30 बजे क्या ऐलान करेंगे

चीन और पाकिस्तान ने ईरान-इजरायल जंग को रोकने के लिए 5-सूत्रीय सीजफायर प्लान पेश किया है, जिसमें तुरंत युद्धविराम, बातचीत और होरमुज में सुरक्षित आवाजाही पर जोर है. हालांकि, अमेरिका और ईरान की सख्त शर्तों के बीच यह साफ नहीं है कि यह प्रस्ताव जंग खत्म करने का रास्ता बना पाएगा या नहीं लेकिन इससे एक कॉमन ग्राउंड जरूर बन सकता है.

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चीन-पाकिस्तान ने ईरान जंग खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है. (Photo- ITG) चीन-पाकिस्तान ने ईरान जंग खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:08 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कल बड़ा ऐलान कर सकते हैं. वह 2 अप्रैल की सुबह देश को संबोधित करने जा रहे हैं. जंग अपने पांचवें हफ्ते में है और इसका अंत कब और कैसे होगा, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. हर दिन के साथ संघर्ष का दायरा बढ़ता जा रहा है, और खाड़ी के कई देश भी इसके प्रभाव में आ चुके हैं. ऐसे माहौल में ट्रंप के संबोधन से पहले दुनिया की नजरें अब उन प्रस्तावों पर टिकी हैं, जो इस आग को थाम सकते हैं.

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चीन और पाकिस्तान ने एक 5-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है. बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद सामने आया यह प्लान पहली नजर में सीधा और संतुलित लगता है. इसमें सबसे पहले बिना किसी शर्त के तुरंत युद्धविराम की बात की गई है, ताकि हालात और बिगड़ने से रोके जा सकें. इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि सभी पक्ष बातचीत की मेज पर लौटें और बिना सैन्य दबाव के समाधान तलाशें.

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इस प्रस्ताव की खास बात यह है कि यह सिर्फ युद्ध रोकने की बात नहीं करता, बल्कि उसके असर को भी कम करने की कोशिश करता है. इसमें नागरिकों और अहम ढांचे, जैसे ऊर्जा प्लांट्स, पानी के प्लांट और परमाणु सुविधाओं को हमलों से बचाने पर जोर दिया गया है. साथ ही, होरमुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है, क्योंकि यही रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ बना हुआ है. प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने की बात भी शामिल है, ताकि एक स्थायी शांति ढांचा तैयार किया जा सके.

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हालांकि, यह प्रस्ताव जितना संतुलित दिखता है, उतना ही मुश्किल इसके लागू होने का रास्ता है. अमेरिका, इजरायल और ईरान तीनों की अपनी-अपनी शर्तें और प्राथमिकताएं हैं, जो एक-दूसरे से काफी अलग हैं.

युद्ध खत्म करने के लिए क्या है ईरान की शर्तें?

ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते से पहले हमले और टारगेट किलिंग पूरी तरह बंद होने चाहिए. वह चाहता है कि भविष्य में ऐसे हालात न बनें, इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. इसके अलावा, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पूरे क्षेत्र में संघर्ष खत्म करने की मांग भी उसने रखी है. सबसे विवादित मुद्दा होरमुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का है, जिस पर ईरान अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है.

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युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका का सख्त प्रस्ताव

अमेरिका का रुख कहीं ज्यादा सख्त है. उसके 15-सूत्रीय प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की बात कही गई है. इसमें प्रमुख परमाणु ठिकानों को बंद करना, यूरेनियम संवर्धन रोकना और मौजूदा स्टॉक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को सौंपना शामिल है. इसके अलावा, मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय समूहों को समर्थन खत्म करने की मांग भी रखी गई है. बदले में अमेरिका ने प्रतिबंधों में राहत और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा में सहयोग का वादा किया है, लेकिन ईरान ने इन शर्तों को एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया है.

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यही वजह है कि युद्धविराम की राह अब भी मुश्किल नजर आती है. चीन-पाकिस्तान का प्रस्ताव एक ऐसा रास्ता जरूर दिखाता है, जहां से बातचीत शुरू हो सकती है, लेकिन असली चुनौती भरोसे की कमी और शर्तें हैं. जब तक दोनों पक्ष अपने रुख में कुछ नरमी नहीं लाते, तब तक किसी ठोस समझौते की उम्मीद कम ही है.

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