लेबनान में इजरायल का भीषण हमला, IDF ने जमींदोज किए कई सीमावर्ती गांव

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत फेल होने के बाद इजरायल ने लेबनान में तबाही मचा दी है. इजराइल की सैन्य कार्रवाई ने लेबनान के कई रिहायशी इलाकों को मलबे में बदल दिया. यहां तक कि कई गांव साफ हो गए हैं.

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लेबनान के गांवों पर इजरायली डिफेंस फोर्सेस के हमलों से मच गया हाहाकार. (File Photo: ITG) लेबनान के गांवों पर इजरायली डिफेंस फोर्सेस के हमलों से मच गया हाहाकार. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:20 PM IST

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो चुकी है. इस बीच इजराइली सेना लेबनान में लगातार हमले कर रही है. आईडीएफ के अटैक में पूरे के पूरे गांव तबाह हो गए हैं. तैबेह और नकौरा जैसे इलाकों में मलबे के सिवा कुछ नहीं बचा है. इस सैन्य कार्रवाई ने मानवीय संकट को गहरा कर दिया है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान के जिन गांवों में कभी जीवन की हलचल थी, वहां अब सन्नाटा, धूल और धुएं का गुबार है. नक्शों में मौजूद ये बस्तियां जमीनी हकीकत में लगभग मिट चुकी हैं. एक सुनियोजित सैन्य मुहिम के तहत पूरे के पूरे समुदायों को निशाना बनाया गया है. इससे पीढ़ियों से बसे घर और दुकानें एक झटके में खत्म हो गईं.

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायली सेना ने कई गांवों में घरों के भीतर विस्फोटक लगाए और फिर दूर से उन्हें उड़ा दिया. वीडियो फुटेज के जरिए तैबेह, नकौरा और देइर सेरियन जैसे इलाकों में इस तरह के ऑपरेशन की पुष्टि हुई है. आसपास के अन्य गांवों में भी इसी तरह की कार्रवाई के दावे किए गए हैं.

हालांकि, सभी घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है. फिर भी जो पैटर्न सामने आ रहा है, वह बेहद चिंताजनक है. अलग-अलग हमलों की बजाय पूरे के पूरे रिहायशी क्लस्टर को एक साथ निशाना बनाया जा रहा है. इस बीच, इजरायल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज के बयान ने इस कार्रवाई को और विवादित बना दिया है. 

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उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि सीमा से सटे गांवों के सभी घरों को तबाह कर दिया जाएगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह रणनीति पहले रफाह और बेत हनौन जैसे इलाकों में अपनाए गए मॉडल पर आधारित है. वहां बड़े पैमाने पर ढांचागत तबाही हुई थी. इसका उद्देश्य उत्तरी इजरायल के लिए सुरक्षा खतरे को खत्म करना है.

हालांकि, इस रणनीति को लेकर पहले भी गंभीर आलोचनाएं होती रही हैं. खासकर रफाह में, जहां बड़े पैमाने पर विनाश हुआ और अनुमान है कि लगभग 90 प्रतिशत घर तबाह हो गए थे. अब वही तरीका लेबनान में अपनाए जाने के आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. इस तरह की व्यापक तबाही क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाएगी.

इतना ही नहीं मानवीय संकट को भी गहरा करेगी. पहले से ही नाजुक स्थिति में जी रहे आम नागरिकों के लिए यह हालात और मुश्किल बन सकते हैं. कूटनीति और जमीनी सच्चाई के बीच का यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि एक तरफ शांति की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ संघर्ष की आग लगातार भड़क रही है. 

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