मिडिल ईस्ट की जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने साफ कर दिया है कि आने वाले हफ्ते में ईरान पर हमले काफी तेज कर दिए जाएंगे. यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद आई है, जिसमें उन्होंने सैन्य अभियानों को कम करने की बात कही थी. एक तरफ ट्रंप पीछे हटने का संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ने क्षेत्र में और अधिक युद्धपोत भेजकर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है.
दरअसल, युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'एग्जिट प्लान' पेश किया था. 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अब वह मिडिल ईस्ट में जारी बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे खत्म करने पर विचार कर रहा है.
वहीं, ट्रंप के बयान बाद इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. न्यूज एजेंसी एपी (AP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक,काट्ज ने साफ चेतावनी दी है कि आने वाले हफ्ते में ईरान पर हमले और भी भीषण कर दिए जाएंगे.
जंग की आग अब ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले नतांज परमाणु संयंत्र तक पहुंच चुकी है. शनिवार को यहां हुए बड़े हवाई हमले में भारी नुकसान की खबर है, हालांकि ईरान का दावा है कि कोई रेडिएशन या परमाणु रिसाव नहीं हुआ. हैरानी की बात यह है कि इजरायल इस हमले में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर रहा है, लेकिन रक्षा मंत्री के हमले तेज करने वाले बयान ने सारा शक इजरायल की तरफ ही मोड़ दिया है.
इस बीच, ईरान ने अपने दुश्मनों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अब दुनिया का कोई भी कोना उनके लिए सुरक्षित नहीं है. ईरान के मुताबिक, अब उसके निशाने पर दुश्मनों से जुड़े पार्क, पिकनिक स्पॉट और दुनिया भर के तमाम पर्यटन स्थल भी हो सकते हैं.
युद्ध का खौफनाक चेहरा दक्षिण-पश्चिमी ईरान के अहवाज में देखने को मिला, जहां एक मनोरंजन परिसर और अस्पताल पर बमबारी हुई. इस हमले में एक मासूम बच्चे की जान चली गई. इमाम अली अस्पताल को इतना नुकसान पहुंचा है कि वहां अब मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई है.
ईरान का ट्रंप पर तंज
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि हमारे लड़ाकों के मजबूत बचाव के बीच, ईरानी जनता ने एकता का एक असाधारण नजारा पेश किया है और सड़कों पर लोगों की भीड़ कम नहीं हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रदर्शन कर रहे इन लोगों को 'एआई' (AI) यानी बनावटी कहा था, जिस पर पलटवार करते हुए पेजेश्कियन ने कहा कि उनके पत्रकार खुद आकर देखें कि लोग अपनी मानवता, अधिकारों और देश की अखंडता की रक्षा के लिए कैसे डटे हुए हैं.
युद्ध का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैल गया है. सऊदी अरब ने अपने पूर्वी इलाके में ऑयल इंस्टॉलेशन की ओर बढ़ रहे 20 ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और जापान समेत 22 देशों ने एक साझा बयान जारी कर ईरान से हमले रोकने और समुद्री व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की मांग की है.
मिडिल ईस्ट में छिड़ी इस जंग को अब चार हफ्ते बीत चुके हैं और अब मौत का आंकड़ा डराने लगा है. इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,300 से ज्यादा और लेबनान में 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अमेरिकी और इजरायली सेना के भी कई जवान शहीद हुए हैं. इस युद्ध का असर दुनिया भर के बाजारों पर भी पड़ा है. तेल की कीमतें अचानक बढ़ने की वजह से अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है.
बिगड़ते हालात और ईंधन के बढ़ते दामों को काबू में करने के लिए ट्रंप सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने का एलान किया है ताकि तेल की कीमतें कम हो सकें. दूसरी तरफ, अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि उनकी सेना ने ईरान के उन सभी ठिकानों को नष्ट कर दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय जहाजों और समुद्री व्यापार के लिए खतरा बने हुए थे.
ट्रंप की रणनीति पर उठते सवाल
भले ही ट्रंप ने अमेरिका को इस युद्ध में धकेल दिया है, लेकिन अब खुद उनकी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से सवाल उठने लगे हैं.न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने ट्रंप सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, 'असली सवाल यह है कि आखिर हम हासिल क्या करना चाहते हैं? मैं निजी तौर पर ईरान की सत्ता से मुल्लाओं को हटाने वाले हर कदम का समर्थन करता हूं, लेकिन इस युद्ध के पीछे एक साफ रणनीति और स्पष्ट उद्देश्य होना बेहद जरूरी है.' युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर के बजट का अनुरोध अभी व्हाइट हाउस में लंबित है और सांसद यह जानने को बेताब हैं कि यह अंतहीन युद्ध आखिर कब और किस कीमत पर खत्म होगा.
aajtak.in