ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान, क्या खुद के टूटने का है खतरा?

ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है, खासकर बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आशंका को लेकर. पाकिस्तान को डर है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से सीमा पार उग्रवाद, हथियार तस्करी और शरणार्थी संकट बढ़ सकता है.

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ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले से पाकिस्तान की सरकार डरी हुई है (Photo: Reuters/File) ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले से पाकिस्तान की सरकार डरी हुई है (Photo: Reuters/File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान के माथे पर पसीना है. अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान को डर है कि अगर ईरान में सत्ता बदली तो विद्रोह की आग उसके यहां भी लग सकती है. पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान से लगा हुआ है जहां आजादी की मांग दशकों से उठ रही है.

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ईरान में अमेरिकी हमले से हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान के इस प्रांत में विद्रोहियों के और अधिक सक्रिय होने की आशंका है. पाकिस्तान में इस बात की काफी चर्चा है और डिप्लोमैट्स कह रहे हैं कि ईरानी शासन का गिरना पाकिस्तान के लिए तबाही लाएगा.

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में एक विश्लेषणात्मक लेख छपा है जिसमें पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स और अधिकारियों के हवाले से लिखा गया  है, 'पाकिस्तान ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, क्योंकि इसकी कीमत तबाही होगी.

लेख में लिखा गया है कि ईरान पाकिस्तान के लिए कोई दूर की चिंता नहीं है. दोनों देशों के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत बलूचिस्तान से लगती है. ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का सीधा असर सीमा पार उग्रवाद, हथियारों की तस्करी, शरणार्थियों की आमद और आर्थिक अस्थिरता के रूप में सामने आ सकता है.

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ईरान में अस्थिरता के बीच पाकिस्तान को सता रहा टूटने का डर

ईरान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी ने कहा, 'ईरान में किसी भी तरह का बदलाव, चाहे वह अंदरूनी घटनाक्रम से आए या बाहरी हस्तक्षेप से, उसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा.'

ईरान में जो भी हो रहा है, उस संबंध में पाकिस्तान सबसे अधिक बलूचिस्तान को लेकर चिंतित है. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में बलूच जनजाति के लोग रहते हैं जिनके पाकिस्तान के बलूच क्षेत्रों से जातीय, जनजातीय और भाषाई रिश्ते हैं.

ईरान में अस्थिरता आती है तो बलूचिस्तान के विद्रोही नेटवर्क को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वो सुरक्षित ठिकानों का फायदा उठाकर सीमा पार गतिविधियां बढ़ा सकते हैं. पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बलूचिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान ने जो भी सफलता हासिल की है, ईरान में अराजकता आती है तो इन सब पर पानी फिर जाएगा.

बलूचिस्तान में कई विद्रोही गुट सक्रिय हैं जो आए दिन प्रांत में तैनात सुरक्षाबलों को निशाना बनाते रहे हैं और चीनी प्रोजेक्ट्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. बलूचिस्तान में चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चाईना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चल रहा है और अगर प्रांत और अशांत होता है तो इसे गंभीर नुकसान होगा. बलोच विद्रोही कह चुके हैं कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और अगर उनका आंदोलन तेज होता है तो बलूचिस्तान के पाकिस्तान से टूटने का खतरा बढ़ जाता है.

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पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम कहते हैं कि पिछली बार जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव था, तब पाकिस्तान ने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का खुलकर समर्थन किया था.

जोहर ने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप- चाहे वह आर्थिक हो, साइबर हो या सैन्य, स्थिति को और बिगाड़ेगा और पहले से दबाव झेल रहे देश को और अस्थिर कर देगा.

पाकिस्तान में बढ़ेगा शरणार्थी संकट

2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था तब वहां से लाखों की संख्या में अफगान शरणार्थी पाकिस्तान आ गए थे. पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहा है, लाखों अफगान शरणार्थियों ने उसकी मुश्किल और बढ़ा दी. अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है या अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है तो पाकिस्तान में एक और बड़ा शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिले कर्ज के सहारे चल रहा पाकिस्तान एक और बड़ा शरणार्थी आगमन झेलने के लिए तैयार नहीं है.

ईरान में सत्ता परिवर्तन पाकिस्तान में तबाही लाएगा

पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान में जबरन सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा. इससे पूरे मध्य-पूर्व में दरारें और गहरी हो सकती हैं, प्रॉक्सी युद्ध बढ़ सकते हैं और चीन, रूस व तुर्की जैसी क्षेत्रीय शक्तियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं.

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पाकिस्तान ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी कामगारों की कमाई के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है. अगर क्षेत्र अस्थिर होता तो पाकिस्तान को खाने के भी लाले पड़ जाएंगे.

पाकिस्तान की मीडिया में कहा जा रहा है कि 'ईरान में अगर सत्ता का पतन होता है तो यह पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक तबाही होगी.

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