ईरान का 'पाताल लोक'... जानिए 3 सीक्रेट ठिकाने, जो US-इजरायल के लिए बनेंगे 'डेथ ट्रैप'

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान की सैन्य रणनीति के ऐसे ठिकाने सामने आ रहे हैं, जिन्हें अमेरिका-इजरायल के लिए 'डेथ ट्रैप' माना जा रहा है. जमीनी जंग की आशंकाओं के बीच ईरान ने अपने अंडरग्राउंड नेटवर्क और मिसाइल ठिकानों के जरिए जवाबी तैयारी तेज कर दी है.

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ईरान की ताकत से बढ़ी अमेरिका-इजरायल की टेंशन, जमीनी जंग हुई तो कौन पड़ेगा भारी. (File Photo: ITG) ईरान की ताकत से बढ़ी अमेरिका-इजरायल की टेंशन, जमीनी जंग हुई तो कौन पड़ेगा भारी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

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  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब ईरान के तीन गुप्त ठिकानों की चर्चा तेज हो गई है. 'मिसाइल सिटी', 'टनल आर्मी' और अंडरग्राउंड बेस से लैस ये ठिकाने किसी भी जमीनी जंग में बड़ा खतरा बन सकते हैं.

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है. बताया जा रहा है कि '86वीं लहर' के हमलों के बीच अब तीन ऐसे ठिकानों की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो किसी भी सैन्य कार्रवाई की दिशा बदल सकते हैं.

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ईरान के तीन सीक्रेट ठिकाने इस प्रकार हैं...

केश्म द्वीप: होर्मुज का 'गेटकीपर'

होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित केश्म द्वीप को ईरान का समुद्री किला माना जाता है. यह रणनीतिक रूप से बेहद अहम जगह है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई पर असर डाला जा सकता है. यहां पहाड़ों के नीचे अंडरग्राउंड मिसाइल सेलर्स का जाल बताया जाता है, जो सीधे समुद्र की ओर खुलते हैं. 

इन ठिकानों पर एंटी-शिप मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन तैनात बताए जाते हैं, जो दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बना सकते हैं.

खोरगो: बैलिस्टिक पावरहाउस 

ईरान का दूसरा अहम और सीक्रेट ठिकाना खोरगो है. इसे ईरान का बैलिस्टिक पावरहाउस कहा जाता है. यहां जमीन के सैकड़ों फीट नीचे मजबूत कंक्रीट से बने वर्टिकल मिसाइल साइलो मौजूद बताए जाते हैं. यहीं से 'खैबर शिकन' जैसी मिसाइलों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है. 

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यह ठिकाना इतना गहरा माना जाता है कि पारंपरिक बंकर-बस्टर हथियारों के लिए भी चुनौती बन सकता है.

हाजी अबाद: मिसाइल सिटी

ईरान तीसरा और सबसे रहस्यमयी ठिकाना हाजी अबाद को माना जाता है. इसे ईरान की 'मिसाइल टनल सिटी' कहा जाता है, जहां पहाड़ों के भीतर लंबी सुरंगों का जाल फैला हुआ है. इन सुरंगों में मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स तैनात बताए जाते हैं, जो 'शूट एंड स्कूट' रणनीति के तहत हमला कर तुरंत छिप सकते हैं और फिर दूसरी जगह से वार कर सकते हैं.

जंग की आहट के बीच बढ़ती चिंता

इन ठिकानों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यदि अमेरिका ने जमीनी स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई की, तो ईरान की यह तैयारी उसे भारी पड़ सकती है. इसी बीच, संघर्ष का दायरा बढ़ता जा रहा है. इस टकराव को शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है. दोनों पक्ष लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं.

परमाणु युद्ध के खतरे की आशंका

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमलों में लामर्ड के रिहायशी इलाके और एक स्पोर्ट्स हॉल को निशाना बनाया गया. वहीं तेहरान में लगातार हो रहे धमाकों के वीडियो भी सामने आ रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने चिंता बढ़ा दी है. उन्होंने  कहा कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने होंगे, वरना उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि ईरान उनकी शर्तें मानता है तो वह फिर से एक महान देश बन सकता है, लेकिन इनकार की स्थिति में उसके लिए हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं. उन्होंने 17 मार्च को दिए बयान में इसे एक बड़े शतरंज के खेल की तरह बताया और कहा कि यह कदम दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है.

क्या बढ़ रहा है वैश्विक खतरा?

इस टकराव ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या इस तरह की आक्रामक नीतियां दुनिया को और बड़े परमाणु खतरे की ओर धकेल रही हैं? विशेषज्ञों के बीच यह चिंता भी उभर रही है कि अगर इस तरह का दबाव बढ़ता रहा, तो कई देश अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों की ओर रुख कर सकते हैं.

ईरान पर कार्रवाई, वेनेजुएला में हस्तक्षेप, ग्रीनलैंड और पनामा को लेकर बयानबाजी, इन सबके बीच यह बहस तेज हो गई है कि क्या दुनिया एक नए और अधिक खतरनाक भू-राजनीतिक दौर की ओर बढ़ रही है. फिलहाल, हालात ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां हर अगला कदम वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर सकता है.

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