ईरान की सेना ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध फिर से शुरू होने की संभावना जताई है. ईरानी सेना मुख्यालय के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी ने कहा कि अमेरिका किसी भी समझौते या संधि के प्रति ईमानदार नहीं है. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, असदी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयान और कदम कूटनीतिक समझौतों के प्रति उनकी गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं.
उन्होंने कहा, 'अमेरिकी अधिकारियों के ज्यादातर बयान मीडिया को ध्यान में रखकर दिए जाते हैं, जिनका मकसद तेल की कीमतों में गिरावट रोकना और अपनी बनाई हुई स्थिति से बाहर निकलना है.' असदी ने यह भी कहा कि ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'अमेरिका की किसी भी नई हरकत या मूर्खता का जवाब देने के लिए हमारी सेना पूरी तरह तैयार है.'
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नए समझौते के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है, जिन्हें वह स्वीकार नहीं कर सकते. व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा रवाना होते समय ट्रंप ने कहा, 'वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं.' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का नेतृत्व बिखरा हुआ है और अलग-अलग समूहों में बंटा हुआ है.
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हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ युद्धविराम के बाद संघर्ष खत्म हो चुका है. उन्होंने ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ को असंवैधानिक बताया. यह कानून राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी के 60-90 दिनों से अधिक समय तक अमेरिकी सेना को किसी विदेशी संघर्ष में उलझाने से रोकता है.
इस बीच, ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि हम ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे, क्योंकि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में उतरना पड़ा. ट्रंप ने कहा, 'अगर हम ऐसा नहीं करते, तो उनके पास परमाणु हथियार होता और इजराइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप तबाह हो जाते. हम ऐसे पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते.'
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