मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए समाधान चाहता है. इसके साथ ही अमेरिका और इजरायल को सख्त चेतावनी भी दी है. इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान कभी भी अस्थिरता या टकराव का पक्षधर नहीं रहा, लेकिन अगर किसी ने उस पर अपनी शर्तें थोपने या उसे झुकाने की कोशिश की, तो वह नाकाम होगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा.
ईरानी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल के हमलों पर सवाल उठाते हुए कहा, 'आखिर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत नागरिकों, बच्चों, बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने और स्कूलों-अस्पतालों जैसे अहम संस्थानों को तबाह करने का क्या औचित्य है?'
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है- संवाद और सहयोग. उन्होंने कहा, 'ईरान न तो युद्ध चाहता है और न ही अस्थिरता. हम केवल बातचीत और सहयोग की बात करते हैं. लेकिन किसी भी देश की ओर से हमारी संप्रभुता पर दबाव डालने या हमें झुकाने की कोशिश को ईरानी जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी.'
उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान पर अपनी इच्छा थोपने या उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की कोई भी कोशिश विफल होगी.
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था. इस दौरान तेहरान समेत कई बड़े शहरों पर हमले किए गए. इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी पलटवार करते हुए इजरायल के कई ठिकानों को निशाना बनाया. साथ ही खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य बेस को निशाना बनाया. इससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है.
तनाव कम करने के लिए 11 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत भी हुई. ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष गलिबाफ ने नेतृत्व किया, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की. हालांकि, कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सके. बातचीत के बाद दोनों देशों ने माना कि कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिसकी वजह से दीर्घकालिक समाधान फिलहाल संभव नहीं हो पाया है.
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