अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा किया है. अरब सागर में सैन्य तैनाती की वजह से तनाव बढ़ा हुआ है. यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब अमेरिका में अगले कुछ महीने में मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रशासन के भीतर ही कई सहयोगी उन्हें आगाह कर रहे हैं कि चुनाव से पहले ईरान की बजाय अर्थव्यवस्था पर फोकस ज्यादा जरूरी है.
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप की कड़ी बयानबाज़ी के बावजूद ईरान पर हमले को लेकर प्रशासन में "एकजुट समर्थन नहीं" है. अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमें ऐसे संदेश से बचना होगा जो मतदाताओं को यह लगे कि सरकार भटक गई है, जबकि वे महंगाई और रोजमर्रा के खर्च को लेकर चिंतित हैं."
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एक ब्रिटिश न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस हफ्ते कैबिनेट सचिवों के साथ एक निजी ब्रीफिंग में रिपब्लिकन कैंपेन अधिकारियों ने साफ कहा कि चुनावी एजेंडा का प्रमुख मुद्दा अर्थव्यवस्था होना चाहिए. ट्रंप उस बैठक में मौजूद नहीं थे.
रिपब्लिकन एडवाइजर ने कहा, "लंबा खिंचने वाला संघर्ष ट्रंप और पार्टी दोनों के लिए राजनीतिक खतरा बन सकता है." ट्रंप की राजनीति विदेशी टकराव को कम करने पर आधारित है, और 'फॉरएवर वॉर्स' को खत्म करना उनका वादा रहा है.
दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस के एक अन्य अधिकारी ने बचाव करते हुए कहा, "राष्ट्रपति की विदेश नीति अमेरिकी लोगों के लिए जीत में बदली है. उनके हर कदम में 'अमेरिका फर्स्ट' है, चाहे दुनिया को सुरक्षित बनाना हो या आर्थिक लाभ हासिल करना हो."
ट्रंप ईरान को दे रहे चेतावनी पर चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को फिर चेतावनी दोहराई कि तेहरान "न्यायसंगत समझौता करे." उन्होंने पहले भी कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता, "न ही यूरेनियम संवर्धन की क्षमता रख सकता है." प्रशासन का दावा है कि राष्ट्रपति कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन "बहुत देर होने से पहले" समझौता जरूरी है.
प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने दी थी धमकी, लेकिन फिर हटे पीछे
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि संभावित हमले के कारणों पर स्पष्टता कम है. मसलन, ट्रंप ने अपने देश के लोगों को ईरान के साथ तनाव के बारे में कम ही जानकारी दी है. शुरुआत में ट्रंप ने जनवरी में ईरान में प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई के जवाब में हमले की धमकी दी थी, लेकिन फिर पीछे हट गए. हाल में उन्होंने ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और यहां तक कि "सत्ता परिवर्तन" की बात भी की, लेकिन यह नहीं बताया कि सिर्फ हवाई हमलों से यह कैसे संभव होगा.
अगर नहीं किया हमला तो अमेरिका की इमेज पर पड़ेगा असर
एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो सर्वे बताते हैं कि 2024 में 'अमेरिका फर्स्ट' और महंगाई घटाने के वादे के साथ दोबारा चुने गए ट्रंप अब भी ऊंची कीमतों को काबू में लाने के मोर्चे पर मतदाताओं को पूरी तरह आश्वस्त नहीं कर पाए हैं. इतिहास बताता है कि मिडटर्म चुनावों में विदेश नीति कम ही निर्णायक मुद्दा बनती है. लेकिन अगर बड़े पैमाने पर विमानवाहक पोत और युद्धक विमान तैनात करने के बाद कार्रवाई नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के "कमजोर" दिखने का जोखिम भी है.
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अगर मिडटर्म चुनाव हार गए ट्रंप तो...
नवंबर का चुनाव तय करेगा कि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण बनाए रखती है या नहीं. एक या दोनों सदन विपक्षी डेमोक्रेट्स के हाथ जाने पर ट्रंप के बाकी कार्यकाल के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं. फिलहाल, व्हाइट हाउस के भीतर बहस यही है कि जंग का जोखिम उठाया जाए या घरेलू अर्थव्यवस्था पर पूरा ध्यान रखा जाए.
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