होर्मुज से आई राहतभरी खबर! ईरान ने जरूरी सामान ले जा रहे जहाजों को दी छूट

Iran allows essential goods vessels to its ports via Hormuz strait: होर्मुज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने इस रास्ते से कुछ जहाजों को जाने के लिए अनुमित दे दी है. इसके साथ ही कुछ शर्त भी रखा है. दुनिया के लिए ये थोड़ी राहत की खबर है. लेकिन, रास्ता पूरा खुला नहीं है तो चिंता बरकरार है. दुनियाभर के कई मुल्कों में ऊर्जा संकट की वजह से उनकी इकोनॉमी बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

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जरूरी सामान वाले जहाजों को ईरान ने होर्मुज के रास्ते से जाने की मंजूरी दे दी है (Photo: Getty) जरूरी सामान वाले जहाजों को ईरान ने होर्मुज के रास्ते से जाने की मंजूरी दे दी है (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:51 PM IST

पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच ईरान से एक बड़ी ख़बर सामने आई है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों को अनुमति दे दी है. लेकिन इसमें ट्विस्ट है कि यह छूट सिर्फ उन जहाजों को मिलेगी जो जरूरी सामान लेकर ईरान के बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं.

ईरान ने साफ कहा है कि ऐसे सभी जहाजों को पहले अधिकारियों से संपर्क करना होगा और तय नियमों का पालन करना होगा. बिना अनुमति कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकेगा.

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दुनिया में एक छोटी सी जगह है जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कहते हैं. यह समुद्र में एक संकरा रास्ता है, जैसे किसी बड़े शहर की सबसे जरूरी गली. फारस की खाड़ी से निकलने वाला तेल इसी रास्ते से होकर एशिया, यूरोप और बाकी दुनिया तक पहुंचता है. दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल यानी हर 5 में से 1 तेल का जहाज इसी रास्ते से गुजरता है. हर रोज 2 करोड़ बैरल तेल यहां से निकलता है.
 
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए. अमेरिका ने इसे "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" नाम दिया. इन हमलों में ईरान के हथियार ठिकाने और परमाणु जगहें तबाह की गईं. ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला खामेनेई समेत कई बड़े अफसर मारे गए.

ईरान चुप नहीं बैठा. उसने इजरायल पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. खाड़ी के देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए. और सबसे बड़ा वार किया, वो रास्ता बंद कर दिया जिस पर पूरी दुनिया निर्भर थी. यानी हॉर्मुज का दरवाजा बंद.

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जब रास्ता बंद हुआ तो क्या हुआ?

ईरान की सेना ने साफ कह दिया कि दुश्मन देशों के जहाज यहां से नहीं गुजरेंगे. नतीजा यह हुआ कि जहां पहले हर महीने 3000 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहां 95 फीसदी ट्रैफिक बंद हो गया. हजारों तेल के जहाज समुद्र में फंसे रहे. 

यह भी पढ़ें: 'डोनाल्ड ट्रंप से ज्यादा सुरक्षित हमारी कैद में', US पायलट की मां की दुआ पर ईरान का तीखा जवाब

तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं. एशियाई देशों में पेट्रोल और गैस की किल्लत होने लगी. पेट्रोल महँगा तो सब कुछ महंगा, खाना, सफर, सामान, सब.

अभी क्या हाल है?

मार्च के आखिर में थोड़ी नरमी आई. ईरान ने कहा कि जो देश उसके दोस्त हैं या दुश्मन नहीं हैं, उनके जहाज गुजर सकते हैं. चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, मलेशिया जैसे देशों के जहाजों को इजाज़त मिली. 

भारत के LPG टैंकर और मलेशिया के तेल जहाज निकाले गए. लेकिन यह पूरी तरह खुलना नहीं है. जहाजों को ईरान से पहले इजाज़त लेनी पड़ती है, फीस देनी पड़ती है और उनके नियम मानने पड़ते हैं.

असल बात क्या है?

ईरान जानता है कि हॉर्मुज उसकी सबसे बड़ी ताकत है. जब तक यह रास्ता उसके कंट्रोल में है, दुनिया उसे नज़रअंदाज नहीं कर सकती. अमेरिका और पश्चिमी देश कहते हैं कि समुद्र का रास्ता किसी एक देश की जागीर नहीं हो सकता. यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि तेल, पैसे और दुनिया की अर्थव्यवस्था की भी है.

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इनपुट: रॉयटर्स

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