अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को 835 साल की सजा, जानें क्या है मामला

अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में भारतीय मूल के भाइयों, भास्कर और अरुण सावनी को करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी के लिए कुल 835 साल की जेल हुई. सरकारी खजाने को ठगा और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन भाइयों की जिंदगी अब सलाखों के पीछे ही कटेगी.

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मेडिकेड और वीजा घोटाले में फंसे सवानी भाई (Image for Representation: File) मेडिकेड और वीजा घोटाले में फंसे सवानी भाई (Image for Representation: File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

पेंसिल्वेनिया में रहने वाले भारतीय मूल के दो भाइयों ने अमेरिका में एक ऐसा बड़ा घोटाला किया है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. बड़े-बड़े ओहदे वाले लोगों के साथ फोटो खिंचवाकर समाज में अपना दबदबा दिखाने वाले इन भाइयों पर जब कानून का शिकंजा कसा, तो उनकी ठगी की एक-एक परत खुलती चली गई. इन भाइयों ने न केवल मासूम मरीजों को अपना शिकार बनाया, बल्कि अमेरिका की दो सबसे बड़ी सरकारी प्रोग्राम मेडिकेड और एच-1बी वीजा में भी करोड़ों की सेंध लगा दी.

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अमेरिकी अदालत ने सुनाई ऐतिहासिक सजा

अमेरिका की एक अदालत ने भारतीय मूल के इन दो भाइयों, भास्कर सावनी और अरुण सावनी को धोखाधड़ी के दर्जनों मामलों में मुजरिम माना है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के मुताबिक, इस पूरे मामले में कोर्ट ने उन्हें इतनी भारी सजा सुनाई है कि सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं. सजा का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि 60 साल के बड़े भाई भास्कर को 420 साल और 58 साल के छोटे भाई अरुण को 415 साल की जेल मिली है. हैरानी की बात तो यह है कि अगर इन दोनों भाइयों की सजा को जोड़ दिया जाए, तो इन्हें कुल 835 साल सलाखों के पीछे गुजारने होंगे. 

ये दोनों भाई उस वक्त अचानक सुर्खियों में आए थे, जब इन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाले एफबीआई (FBI) चीफ काश पटेल के साथ अपनी तस्वीरें साझा की थीं. समाज के ताकतवर लोगों के साथ अपनी नजदीकी दिखाकर ये भाई आम लोगों के बीच अपना रौब जमाते थे. इसी दबदबा के दम पर इन्होंने अपना नेटवर्क फैलाया, लेकिन अब अमेरिकी न्याय विभाग ने इनके सावनी समूह के असली चेहरे को दुनिया के सामने ला दिया है. जांच में साफ हो गया कि डॉक्टर के वेश में ये लोग असल में एक आपराधिक गिरोह चला रहे थे, जिनका मकसद सिर्फ लूटपाट करना था.

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सरकारी खजाने के साथ मरीजों की सेहत से खिलवाड़

इन भाइयों की जालसाजी का तरीका इतना हैरान करने वाला है कि कोई भी दंग रह जाए. इन्होंने अमेरिका में गरीबों और जरूरतमंदों के इलाज के लिए चलने वाली 'मेडिकेड' योजना को अपना निशाना बनाया. भास्कर और अरुण ने अपने क्लीनिकों का ऐसा जाल बुना था कि असलियत में डॉक्टर विदेश की सैर कर रहे होते थे, लेकिन कागजों पर उनके नाम से अमेरिका में इलाज के भारी-भरकम बिल फाड़े जा रहे थे. लालच की हद तो तब पार हो गई, जब इन्होंने मरीजों के दांतों में ऐसे नकली इंप्लांट लगा दिए, जिन्हें इंसानों पर इस्तेमाल करने की सरकारी मंजूरी तक नहीं मिली थी. महज पैसा कमाने की सनक में इन्होंने बेगुनाह लोगों की जान को खतरे में डाल दिया.

वीजा के नाम पर अपनों का ही किया शोषण

सावनी ब्रदर्स की धोखाधड़ी का सिलसिला यहीं नहीं थमा, इन्होंने भारत से आने वाले कामगारों को भी नहीं बख्शा. अमेरिका में काम करने के लिए दिए जाने वाले एच-1बी वीजा कार्यक्रम का इन्होंने जमकर गलत फायदा उठाया. ये लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मजदूरों और कर्मचारियों को भारत से अमेरिका बुलाते थे. एक बार जब वो लोग वहां पहुंच जाते, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता और उनके वेतन का एक बड़ा हिस्सा रिश्वत के तौर पर वापस छीन लिया जाता था. इस पूरे काले कारोबार से इन्होंने करीब 30 मिलियन डॉलर की हेराफेरी की.

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फर्जी कंपनियों के जरिए काली कमाई को बनाया सफेद

मामले की गहराई तब पता चली जब अधिकारियों ने उनके एक जटिल मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन का खुलासा किया. जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी से कमाए गए करोड़ों रुपयों को कई फर्जी कंपनियों और उनके बैंक खातों में घुमाया जाता था. इस चालाकी के पीछे मकसद यह था कि पैसों के असली स्रोत को छुपाया जा सके और अंत में सारा मुनाफा इन भाइयों और उनके कारोबार को मिल जाए. इसी फर्जीवाड़े के दम पर इन्होंने अपनी काली कमाई को सफेद करने की पूरी कोशिश की.

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घर के खर्चों के लिए भी सरकारी खजाने में लगाई सेंध

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इनके भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे किस्से सामने आने लगे जिसे सुनकर अधिकारी भी दंग रह गए. जांच में यह भी पता चला कि ये दोनों भाई अपने बच्चों की कॉलेज फीस, घर का टैक्स और यहां तक कि अपने आलीशान बंगले की मरम्मत का खर्चा भी अपनी जेब से नहीं, बल्कि सरकारी और कंपनी के पैसों से निकाल रहे थे. इतना ही नहीं, इन्होंने इन निजी खर्चों को कागजों पर 'बिजनेस का खर्चा' दिखाया ताकि टैक्स की चोरी की जा सके. हालांकि, अब जुलाई 2026 में सजा पर अंतिम मुहर लगेगी, लेकिन सच तो यह है कि इन भाइयों का नाम और काम दोनों अब पूरी तरह मिट्टी में मिल चुका है.

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