भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों पर लेबनान में हुए हालिया हमलों की निंदा की. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया.
29 मार्च को लेबनान में अदचित अल कुसायर के पास संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के पास प्रोजेक्टाइल आकर गिरी. इस घटना में इंडोनेशिया के एक शांतिसैनिक की मौत हो गई जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने इस हमले की कड़ी निंदा की. इस संबंध में बयान जारी कर कहा गया कि हम UNIFIL में तैनात शांति सैनिकों पर हुए हालिया हमलों की निंदा करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं. हम सभी पक्षों से शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं.
बयान में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना बहुपक्षवाद का जीवंत उदाहरण है. संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सबसे बड़े और लंबे समय से योगदान देने वाले देशों में से एक होने के नाते और इस मिशन में सबसे अधिक बलिदान देने के कारण भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 को आगे बढ़ाया.
बयान में कहा गया कि अगस्त 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए इस प्रस्ताव में सदस्य देशों से अपील की गई थी कि वे शांति सैनिकों की हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने और उनके खिलाफ हिंसा के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करें।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की. यह घटना दक्षिणी लेबनान के एत-तैबे में उस समय हुई जब इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी था. गुटेरेस ने मृतक शांति सैनिक के परिवार, मित्रों और सहयोगियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायल सैनिक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
उन्होंने कहा कि यह हाल के 48 घंटों में शांति सैनिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कई घटनाओं में से एक है. गुटेरेस ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और संयुक्त राष्ट्र कर्मियों तथा संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की. उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति सैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन हैं और इन्हें युद्ध अपराध माना जा सकता है.
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