मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान उस जगह पर ला खड़ा किया है, जो दिखने में छोटी है लेकिन असर है दमदार-ईरान के आईलैंड्स. खाड़ी में फैले ये द्वीप अब सिर्फ भौगोलिक इकाइयां नहीं रह गए हैं, बल्कि जंग, तेल और वैश्विक रणनीति के सबसे अहम केंद्र बन चुके हैं.
ईरान के पास करीब 400 छोटे-बड़े द्वीप हैं, जिनमें से ज्यादातर आबाद नहीं हैं. लेकिन कुछ ऐसे हैं जो न सिर्फ ईरान की ताकत की रीढ़ हैं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. खासकर होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास के आईलैंड आज के समय में वैश्विक राजनीति का "हॉटस्पॉट" बन चुके हैं.
खर्ग आईलैंड
अगर किसी एक द्वीप को ईरान की "आर्थिक धड़कन" कहा जाए, तो वह है खर्ग आईलैंड. ईरान के कच्चे तेल का 90% निर्यात इसी आईलैंड से होता है. यहां विशाल स्टोरेज टैंक हैं, जिनमें लाखों बैरल तेल स्टोर है और यहीं से टैंकरों के जरिए दुनिया भर में भेजा जाता है.
करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीप ईरान के लिए इतना अहम है कि इसे "फॉरबिडन आईलैंड" भी कहा जाता है. यहां आम लोगों की एंट्री सीमित है और सुरक्षा पूरी तरह IRGC के हाथ में है. जंग के दौरान यह द्वीप कई बार निशाने पर भी रहा है, क्योंकि अगर यह ठप पड़ता है, तो ईरान की तेल सप्लाई लगभग रुक सकती है.
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होर्मुज और लारक आईलैंड
होर्मुज आईलैंड और उसके आसपास का इलाका ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है. यही वह क्षेत्र है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. इस स्ट्रेट पर नियंत्रण का मतलब है, दुनिया की ऊर्जा नब्ज पर पकड़. लारक आईलैंड इस कंट्रोल को और मजबूत करता है. यहां ईरान ने बंकर, मिसाइल सिस्टम और अटैक बोट्स तैनात कर रखी हैं. हाल के दिनों में यह द्वीप एक तरह का "टोल गेट" बन गया है, जहां से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ जहाजों से गुजरने के लिए भारी रकम तक वसूली गई है.
केशम आईलैंड
खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप केशम, ईरान के लिए दोहरी भूमिका निभाता है. यह आईलैंड ईरान का सैन्य और आर्थिक हब भी है. 1400 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैला यह द्वीप फ्री ट्रेड जोन भी है और ईरानी नौसेना का अहम बेस भी. यहां IRGC का एक कथित "अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी" भी बताया जाता है, जहां से ड्रोन, मिसाइल और नौसैनिक ऑपरेशन को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके अलावा, इसकी भौगोलिक स्थिति इसे होर्मुज स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए अहम बनाती है.
अबू मूसा और तुंब आईलैंड
अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब, ये तीन द्वीप सिर्फ रणनीतिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक विवाद का भी केंद्र हैं. इन पर ईरान का नियंत्रण है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात भी इन पर दावा करता है. अबू मूसा में करीब 2000 लोग रहते हैं और यह ईरान की फ्रंटलाइन माना जाता है. वहीं, तुंब द्वीपों पर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन सिस्टम तैनात कर रखे हैं. जंग के दौरान इन द्वीपों का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि ये समुद्री रास्तों को कंट्रोल करने में मदद करते हैं.
किश और हेंगाम आईलैंड
जहां एक तरफ ये द्वीप सैन्य और रणनीतिक भूमिका निभाते हैं, वहीं कुछ द्वीप ईरान के सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी दर्शाते हैं. किश आईलैंड ईरान का सबसे बड़ा टूरिस्ट हब है, जहां हर साल लाखों लोग आते हैं. यह एक फ्री ट्रेड जोन भी है और यहां विदेशी बिना वीजा के आ सकते हैं. हेंगाम द्वीप अपनी अनोखी "महिला मछुआरा समुदाय" के लिए जाना जाता है. यहां महिलाएं ही परिवार की मुख्य कमाने वाली हैं, जो इसे पूरे क्षेत्र में अलग पहचान देता है.
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जंग में आईलैंड क्यों बने सबसे बड़ा हथियार?
ईरान ने इन द्वीपों को सिर्फ रहने या व्यापार के लिए नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार के रूप में विकसित किया है. ड्रोन, मिसाइल, माइन और नौसैनिक ताकत के जरिए ये द्वीप पूरे खाड़ी क्षेत्र को कंट्रोल करने की क्षमता रखते हैं. खास बात यह है कि ये "असिमेट्रिक वॉरफेयर" का हिस्सा हैं. यानी कम संसाधनों में ज्यादा ताकत दिखाने वाली बात है. अमेरिका जैसी बड़ी ताकत के सामने सीधे टकराव के बजाय, ईरान इन द्वीपों के जरिए समुद्री रास्तों को असुरक्षित बनाकर दबाव बनाता है.
आज हालात ऐसे हैं कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की कीमतों में उछाल आ जाता है, सप्लाई चेन प्रभावित होता है. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है. ऐसे में ईरान के ये छोटे-छोटे द्वीप पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं. अमेरिका भी अब इन द्वीपों की अहमियत को समझ चुका है. खर्ग और अबू मूसा जैसे द्वीपों को लेकर उसकी रणनीति और आक्रामक होती दिख रही है. लेकिन इन पर सीधा हमला करना आसान नहीं, क्योंकि इससे जंग और ज्यादा फैल सकती है.
एम. नूरूद्दीन