मध्य पूर्व में रमजान के मौके पर प्रसारित होने वाले टीवी शोज को लेकर तैयारियां तेज हैं, लेकिन इस बार एक मिस्री सीरियल ने प्रसारण से पहले ही बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. गाजा युद्ध पर आधारित 15 एपिसोड की सीरीज 'साहब अल-अर्द' यानी "ओनर्स ऑफ द लैंड" का ट्रेलर जारी होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई.
सीरियल की कहानी गाजा पट्टी में भेजे गए एक मिस्री मेडिकल प्रतिनिधिमंडल के इर्द-गिर्द घूमती है. इसमें मशहूर अभिनेत्री मेन्ना शलबी एक इमरजेंसी डॉक्टर 'सलमा' की भूमिका निभा रही हैं, जबकि जॉर्डन के एक्टर अयाद नस्सार एक फिलिस्तीनी किरदार 'नस्र' के रूप में नजर आएंगे. ट्रेलर में धमाकों, अस्पतालों में घायलों, दरवाजे तोड़ते सैनिकों, फिलिस्तीनी पत्रकारों और राहत ट्रकों की झलकियां दिखाई गई हैं.
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हालांकि, ट्रेलर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. एक यूजर ने लिखा, "गाजा कोई स्क्रिप्ट नहीं है, और उसका खून प्रमोशनल मटेरियल नहीं है." एक अन्य ने टिप्पणी की, "जिसने त्रासदी को टीवी सीरियल में बदला, वह कलाकार नहीं बल्कि नैतिक अपराध में भागीदार है."
कुछ लोगों ने समय पर सवाल उठाए. एक पोस्ट में कहा गया, "युद्ध अभी जारी है… और हम लाखों खर्च कर रहे हैं ऐसे कला पर जो कुछ हल नहीं करेगी… क्यों न ये रकम फिलिस्तीनियों को दान कर दी जाए?"
कई आलोचकों ने कलाकारों पर भी पाखंड का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि वे पहले फिलिस्तीन के समर्थन में मुखर नहीं थे. वहीं कुछ ने इसे मिस्र की छवि सुधारने की कोशिश बताया.
एक फिलिस्तीनी यूजर ने लिखा, "जिन लोगों ने फिल्म बनाई, वही फिलिस्तीन के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर रोक लगाते हैं." फेसबुक पर एक यूजर ने लिखा, "हमने उन्हें मरने और घिरने दिया, और फिर उनकी वीरता पर शो बना दिया."
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यह सीरीज मिस्र के बड़े टीवी चैनल ON E द्वारा बनाई गई है, जो मिस्र की जनरल इंटेलिजेंस सर्विस के स्वामित्व में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैनल से इस विवाद पर प्रतिक्रिया मांगी गई है.
दिलचस्प बात यह है कि कुछ सरकार समर्थक सोशल मीडिया यूजर्स ने भी शो के बहिष्कार की मांग की है. उनका तर्क है कि मिस्री मीडिया को केवल घरेलू मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि फिलिस्तीनी मुद्दे को प्रमुखता देनी चाहिए. रमजान के दौरान प्रसारण के लिए तैयार यह सीरियल अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक बहस का केंद्र बन गया है.
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