ट्रंप का प्लान हवा-हवाई! गाजा को दोबारा बनाने में खर्च होगा 70 अरब डॉलर लेकिन...

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दर्जन से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ गाजा को लेकर अहम बैठक करने जा रहे हैं. 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में 5 अरब डॉलर की शुरुआती फंडिंग पर चर्चा होगी, जहां गाजा पुनर्निर्माण पर 70 अरब डॉलर के खर्च होने की संभावना है.

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गाजा पीस बोर्ड की पहली मीटिंग होने जा रही है. (Photo- ITG) गाजा पीस बोर्ड की पहली मीटिंग होने जा रही है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा को लेकर एक नई बहुपक्षीय पहल शुरू करने जा रहे हैं. वे दो दर्जन से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक करेंगे. इस बैठक में युद्ध से बुरी तरह प्रभावित गाजा के पुनर्निर्माण, कानून व्यवस्था बहाली और इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स की तैनाती जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. गाजा में फिलहाल युद्धविराम लागू है, जिसे स्थायी शांति में बदलना इस पहल का मुख्य उद्देश्य बताया जा रहा है.

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बैठक से पहले ट्रंप ने कहा कि बोर्ड के सदस्य देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर देने का वादा किया है. हालांकि, आकलन के मुताबिक गाजा को दोबारा खड़ा करने के लिए करीब 70 अरब डॉलर की जरूरत होगी. यानी अभी घोषित राशि कुल आवश्यकता का बहुत ही छोटा हिस्सा है.

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सूत्रों के अनुसार, सदस्य देश गाजा में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हजारों कर्मियों को स्टेबिलाइजेशन फोर्स और पुलिस बल के रूप में भेजने की घोषणा भी कर सकते हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "दुनिया के महान नेता बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हो रहे हैं. मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे प्रभावशाली बोर्ड बन सकता है." यह पहल उनकी 20 सूत्रीय शांति योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है.

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अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद ट्रंप की सोच और व्यापक हो गई है. अब वे चाहते हैं कि यह बोर्ड न केवल इजराइल और हमास के बीच स्थायी शांति स्थापित करे, बल्कि अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में भी भूमिका निभाए.

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हालांकि बैठक से पहले ही युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है. कुछ देशों में यह चिंता भी जताई जा रही है कि कहीं यह पहल संयुक्त राष्ट्र का विकल्प तैयार करने की दिशा तो नहीं है. ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वे चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र “और सक्रिय” हो. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र में बहुत क्षमता है, लेकिन वह अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाया है.”

एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक 40 से अधिक देश और यूरोपीय संघ इस बैठक में अपने प्रतिनिधि भेजेंगे. जर्मनी, इटली, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे कुछ देश बोर्ड में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन वे पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में भाग लेंगे.

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