अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तब से ही लगभग हर दिन गोली-बम और तबाही की बात करते आ रहे हैं. युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक शायद ही कोई दिन होगा, जिस दिन डोनाल्ड ट्रंप के मुंह से ईरान पर गोलाबारी न हुई हो. युद्ध की शुरुआत में 'गोलीबाज' ट्रंप 37वां दिन आते-आते अब 'गालीबाज' ट्रंप में तब्दील होते नजर आए.
ट्रंप के इस ट्रांसफॉर्मेशन के पीछे वजह जो भी हो, अब वह गाली-गलौज पर उतर आए हैं. इसे लेकर ट्रंप की आलोचना भी हो रही है और खुद उनके ही देश में सवाल मेंटल हेल्थ को लेकर भी उठने लगे हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया, जिसमें गाली थी और ईरान को यह संदेश भी कि अब अल्लाह से प्रार्थना करते रहें. गोलीबाज ट्रंप की गालीबाजी ईरान के युद्ध में टिक जाने की लंबा खिंचने की निराशा है या होर्मुज की हताशा.
होर्मुज का सरप्राइज
अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार धमकियों के बावजूद ईरान ने होर्मुज नहीं खोला. होर्मुज बंद होने से दुनियाभर में क्रूड ऑयल के दाम बेतहाशा बढ़े और एलपीजी की भी किल्लत हो गई. ईरानी संसद से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारी टोल लगाने का बिल भी पारित हो चुका है.
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शिपिंग डेटा के मुताबिक बड़ी संख्या में जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान की औपचारिक मंजूरी के इंतजार में खड़े हैं. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में ईरान ने कुछ चुनिंदा जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी केवल 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसा ही है. ईरान के होर्मुज बंद करने के बा बाद इसे लेकर भी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार सुर बदलते नजर आए. पहले धमकियों के बाद ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं है. वह इस रूट से तेल नहीं लाते हैं और अन्य देश इसकी सुरक्षा खुद करें.
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ट्रंप ने हाल ही में ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर यह भी कहा था कि थोड़ा और समय मिले तो हम आसानी से होर्मुज स्ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. दुनिया में तेल की नदियां बहेंगी. अब ट्रंप ने फिर से होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर होर्मुज नहीं खुला, तो अनर्थ मचेगा. ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के पुल और पावर प्लांट को बनाने की बात भी कही है.
अमेरिका के दोस्तों पर हमला
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद अपने पड़ोस में स्थित उन देशों पर भी हमला बोल दिया, जो अमेरिका के करीब माने जाते हैं या जिन देशों में अमेरिका के सैन्य बेस हैं. ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर समेत कई देशों में अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइलें और ड्रोन दागे. अमेरिकी कंपनियों के दफ्तरों को भी निशाना बनाया और होटल्स को भी यह चेतावनी दे दी कि वे अमेरिकी सैनिकों को रहने के लिए कमरे ना दें. ऐसा किया तो उन पर भी हमले होंगे.
फाइटर जेट डाउन
ईरान के साथ जारी जंग में अमेरिका को फाइटर जेट, ड्रोन का भी नुकसान उठाना पड़ा है. ईरान ने 3 अप्रैल को ही F-15E लड़ाकू विमान मार गिराया. ईरान ने अमेरिकी ए-10 थंडर के साथ ही एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को भी मार गिराने का दावा किया था. इससे पहले, कुवैत में भी अमेरिकी सेना के फाइटर जेट गिरे थे. हालांकि, ये लड़ाकू विमान गलती से एयर डिफेंस सिस्टम की जद में आ जाने की बातें कुवैत की ओर से कही गई थीं.
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पायलट रेस्क्यू की शर्तें
ईरानी सेना ने 3 अप्रैल को अमेरिका का F-15E लड़ाकू विमान मार गिराया. इस लड़ाकू विमान में सवार पायलट और वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर इजेक्ट कर गए थे. पायलट को अमेरिकी सेना ने कुछ घंटों में ही रेस्क्यू कर लिया था, लेकिन वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर को रेस्क्यू करने के लिए ट्रंप को दो सौ सैनिक, दर्जनों लड़ाकू विमान यानी पूरा हवाई बेड़ा उतारना पड़ा. इस रेस्क्यू मिशन के दौरान अमेरिका के दो ट्रांसपोर्ट विमानों में तकनीकी खामी आ गई, जिसके बाद उसे अपने ही विमान खुद उड़ाने भी पड़े.
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ईरान की अपनी शर्तें
ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें रख दी थीं. ईरान ने यह भरोसा मांगा था कि उसके ऊपर फिर कभी हमला नहीं होगा. युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भारी-भरकम मुआवजा दिया जाए. अब Axios की रिपोर्ट के मुताबिक दो फेज वाली डील की शर्तों पर बातचीत हो रही है. ईरान ने अपने मध्यस्थों के जरिये 45 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है. युद्धविराम की अवधि में युद्ध समाप्ति को लेकर बातचीत हो सकती है.
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