राष्ट्रपति ट्रंप ने ठुकराया ईरान का नया प्रस्ताव, डील को लेकर सस्पेंस बरकरार

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का नया प्रस्ताव खारिज करते हुए समझौते पर संदेह जताया है. उन्होंने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए ईरान के प्रस्ताव पर कहा कि मैं संतुष्ट नहीं हूं.

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ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था. (Photo: AP) ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:56 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का नया प्रपोजल खारिज कर दिया है. शुक्रवार को ईरान के साथ किसी समझौते की संभावना पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान की तरफ से भेजे गए प्रस्तावों से मैं खुश नहीं हूं, क्योंकि बातचीत काफी लंबी खिंचती जा रही है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं स्योर नहीं हूं कि अमेरिका-ईरान का कोई समझौता कर पाएगा या नहीं.

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AP की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में ईरान के ताज़ा प्रस्ताव से मैं संतुष्ट नहीं हूं. वे एक समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं, इसलिए हम देखेंगे कि आगे क्या होता है." हालांकि, ट्रंप ने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया कि उन्हें ईरान के प्रस्ताव में क्या खामियां नजर आ रही हैं.

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने गुरुवार रात पाकिस्तान में मध्यस्थों को बातचीत के लिए अपना ताज़ा प्रस्ताव सौंपा. रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान ने ईरान की तरफ से बातचीत का नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है. 

'नेतृत्व बिखरा हुआ है...'

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पिछले हफ़्ते पाकिस्तान के दौरे पर जाने वाले अधिकारियों का दौरा रद्द करने के बाद भी फ़ोन पर बातचीत जारी रही है. ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व के प्रति निराशा ज़ाहिर की, जिसे उन्होंने 'बिखरा हुआ' बताया. उन्होंने कहा, "बहुत ही बिखरा हुआ नेतृत्व है. वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन वे सभी पूरी तरह से उलझे हुए हैं."

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ईरान के नए प्रस्ताव में क्या है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सरकारी मीडिया और एक पाकिस्तानी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए अपना नया प्रस्ताव पेश किया है. इस कदम से ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में आई रुकावट को दूर करने की उम्मीद जग सकती है.

युद्ध को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल उस अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को गुरुवार देर रात यह प्रस्ताव मिला था और उसने इसे अमेरिका को भेज दिया है. न तो उस अधिकारी ने और न ही ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी दी. इस प्रस्ताव की खबर आने के बाद, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में थोड़ी नरमी आई. हालांकि, ये कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर बनी हुई हैं.

यह भी पढ़ें: समंदर में फंसे हैं 41 तेल टैंकर! ईरान पर अमेरिकी शिकंजे से ऐसे निकली चीन की हवा

अराघची ने कई देशों से की बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को अपने कई क्षेत्रीय समकक्षों के साथ फ़ोन पर बातचीत की. इस चर्चा में तुर्की, मिस्र, कतर, सऊदी अरब, इराक और अज़रबैजान के विदेश मंत्री शामिल थे. उन्होंने इन नेताओं को युद्ध खत्म करने के लिए अपने देश द्वारा की जा रही ताज़ा पहलों के बारे में जानकारी दी.

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यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने भी शुक्रवार को फ़ोन पर अराघची से बात की. कल्लास के दफ्तर द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने होरमुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों और लंबे वक्त के लिए सुरक्षा व्यवस्थाओं पर चर्चा की. कैलस EU के खाड़ी सहयोगियों के भी संपर्क में रही हैं.

पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं. 

होर्मुज बंद होने पर ग्लोबल लेवल पर असर

होरमुज़ स्ट्रेट के बंद होने से ऊर्जा बाज़ारों में अभूतपूर्व उथल-पुथल मच गई है. इससे दुनिया की 20% तेल और गैस आपूर्ति बाधित हो गई है और तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है. समुद्री मार्ग की नाकेबंदी से यह चिंता भी बढ़ गई है कि आर्थिक मंदी आ सकती है. अमेरिकी नौसेना ईरानी कच्चे तेल के निर्यात को रोक रही है.

दो सीनियर ईरानी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है. अगर उस पर हमला होता है, तो वह इसका कड़ा जवाब देने की योजना बना रहा है. ईरान का आकलन है कि अमेरिका की तरफ से एक छोटा और ज़ोरदार हमला हो सकता है, जिसके बाद मुमकिन है कि इज़रायल भी हमला कर सकता है.

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अमेरिका और ईरान के बीच तीन हफ़्तों से चल रहा सीजफायर अभी भी कायम दिख रहा है. हालांकि, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर इसके उल्लंघन के आरोप लगाए हैं. सीजफायर के बाद लड़ाई काफी हद तक रुक गई है, फिर भी अमेरिका और ईरान 'होरमुज़ स्ट्रेट' को लेकर आमने-सामने हैं. दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी गलियारे से गुजरता है. अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी की वजह से ईरान के तेल टैंकर समुद्र में नहीं निकल पा रहे हैं, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है. ईरान द्वारा इस होर्मुज स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल बनाए रखने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ रहा है.

यह भी पढ़ें: कितनी खतरनाक है डार्क ईगल हाइपरसोनिक मिसाइल, जिसे ईरान के खिलाफ तैनात करेगा अमेरिका?

इस हफ़्ते की शुरुआत में ट्रंप ने एक नई योजना पेश की थी, जिसका मकसद उस जरूरी समुद्री मार्ग को फिर से खोलना था, जिसका उपयोग अमेरिका के खाड़ी सहयोगी अपने तेल और गैस के निर्यात के लिए करते हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने Axios को बताया था कि उन्होंने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिसमें ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने के बदले होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात कही गई थी.

 
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