अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान तय समयसीमा के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों पर बड़ा हमला कर सकता है. ट्रंप अपनी सख्त बयानबाजी और धमकियों के लिए जाने जाते हैं. लेकिन बयानबाजी को लेकर उनका रवैया भी ढीला रहा है.
ट्रंप ने शुरुआत में ईरान को 48 घंटे का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि अगर वह इस दौरान स्ट्रेट नहीं खोलता, तो हमला किया जाएगा, लेकिन जैसे ही दुनिया इस टकराव के नतीजे का इंतजार कर रही थी, ट्रंप ने तनाव कम करते हुए समयसीमा बढ़ा दी.
अब तक ट्रंप तीन बार समयसीमा बढ़ा चुके हैं और नई डेडलाइन सात अप्रैल को समाप्त हो रही है. पहली चेतावनी 48 घंटे की थी, जिसे बाद में पांच दिन किया गया और फिर 10 दिन और बढ़ा दिया गया. इस तरह 48 घंटे की मूल समयसीमा अब बढ़कर कुल 408 घंटे हो चुकी है.
डेडलाइन और देरी: ट्रंप की रणनीति
22 मार्च: ट्रंप ने पहली बार चेतावनी दी कि अगर ईरान ने स्ट्रेट नहीं खोला, तो उसके प्रमुख ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जाएगा.
23 मार्च: डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले, उन्होंने 5 दिन की मोहलत दी और कहा कि तेहरान के साथ बातचीत “अच्छी और सकारात्मक” रही है.
26 मार्च: उन्होंने ईरान को “जल्दी गंभीर होने” की चेतावनी दी और समयसीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी. इसके बाद उन्होंने फिर 10 दिन का विस्तार किया.
6 अप्रैल: ट्रंप ने डेडलाइन को 24 घंटे और बढ़ाकर 7 अप्रैल रात 8 बजे कर दिया. उन्होंने बाद में लिखा कि मंगलवार ईरान में ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ होगा.
क्या ट्रंप फिर से समयसीमा बढ़ाएंगे?
ईरान को पहले से ही उम्मीद है कि ट्रंप अपनी पिछली रणनीति के अनुसार डेडलाइन फिर बढ़ा सकते हैं. अमेरिकी अधिकारियों का भी कहना है कि यदि बातचीत में प्रगति दिखती है, तो सैन्य कार्रवाई टाली जा सकती है.
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगर राष्ट्रपति को लगे कि समझौता हो सकता है, तो वह रुक सकते हैं लेकिन अंतिम फैसला उन्हीं का होगा. हालांकि, ट्रंप ने सोमवार को कहा कि मंगलवार की डेडलाइन अंतिम है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर बातचीत चल रही है और समयसीमा से पहले समझौता हो सकता है. उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर सौदा नहीं हुआ, तो मैं वहां सब कुछ तबाह कर दूंगा.
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे संदेशों और पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए हो रही है. हालांकि, ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को कई बार खारिज किया है और बदले में 10 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है.
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