नेपाल में शी जिनपिंग की किताबें जलाने पर विवाद, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति

नेपाल के मनमोहन कॉलेज में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की किताबें जलाने की घटना ने कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. चीन ने कड़ा विरोध जताते हुए कार्रवाई की मांग की है. नेपाल सरकार ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना से दोनों देशों के रिश्तों पर असर की आशंका बढ़ गई है.

Advertisement
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की किताब जलाई गई. (Photo- ITG) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की किताब जलाई गई. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:15 PM IST

नेपाल के मोरंग जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अचानक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी. यहां मनमोहन टेक्निकल कॉलेज में सैकड़ों किताबों को आग के हवाले कर दिया गया, जिनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चर्चित किताब "द गवर्नेंस ऑफ चाइना" भी शामिल थी. यह किताब चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के भाषणों और लेखों का कलेक्शन है, जिसे पांच वॉल्यूम में प्रकाशित किया गया था.

Advertisement

शनिवार रात हुई इस घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. वीडियो में कुछ लोग कॉलेज परिसर के अंदर किताबें और दस्तावेज जलाते नजर आ रहे हैं. कुछ लोग कैमरे के सामने किताब दिखाते भी दिखाई देते हैं. 

यह भी पढ़ें: नेपाल में हेलिकॉप्टर क्रैश, लैंडिंग के वक्त हादसा, अंतिम संस्कार में जा रहा था एक ही परिवार

घटना के सामने आते ही काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. दूतावास ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को औपचारिक नोट भेजकर कहा कि "इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं." 

नेपाल सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है. नेपाल के गृह मंत्री ओम प्रकाश ने कहा, "हमने स्थानीय प्रशासन को जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा." वहीं मोरंग के प्रमुख जिला अधिकारी युवराज कट्टेल ने कहा, "यह हमारे पड़ोसी देश से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए सच्चाई तक पहुंचना बेहद जरूरी है."

Advertisement

किताबें जलाने पर कॉलेज प्रशासन ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है, आखिर इतनी बड़ी संख्या में ये किताबें कॉलेज में आई कहां से और इन्हें जलाने की जरूरत क्यों पड़ी? कॉलेज प्रशासन का दावा है कि ये किताबें कई सालों से पड़ी थीं और कीड़ों से खराब हो चुकी थीं. एक अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा, "कमरे में जगह की कमी थी, इसलिए स्टाफ ने पुराने सामान को हटाने का फैसला लिया."

यह भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका जंग का असर... नेपाल में पेट्रोल 31, डीजल 54 और गैस सिलेंडर 296 रुपये महंगा

जगह खाली करने के नाम पर जलाई गई किताबें?

लेकिन इस दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय पत्रकार सोनू कुमार दास का कहना है, "ज्यादातर किताबें नई जैसी थीं. उन्हें सिर्फ जगह खाली करने के नाम पर जलाया गया." इस घटना के बाद जिला प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों ने मीडिया से इसे हटाने की अपील भी की, ताकि नेपाल-चीन संबंधों पर असर न पड़े.

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चीन पहले से ही नेपाल में कुछ अन्य मुद्दों को लेकर सतर्क है. ऐसे में किताबें जलाने की यह घटना दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है. अब सबकी नजर जांच पर टिकी है. यह साफ होना बाकी है कि यह महज लापरवाही थी या इसके पीछे कोई और वजह छिपी हुई है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement