ट्रंप ने दी क्यूबा पर कब्जे की धमकी तो सामने खड़ा हो गया चीन! बोला- पिछलग्गू नहीं है

अमेरिका की नाकेबंदी और ट्रंप की धमकियों के बीच क्यूबा गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है. ट्रंप के टैरिफ की डर से कोई भी देश क्यूबा की मदद को सामने नहीं आ रहा है. इस बीच चीन ने क्यूबा के आगे मदद का हाथ बढ़ाया है.

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ट्रंप की धमकी के बीच चीन क्यूबा की मदद के लिए आगे आया है (File Photo: Reuters) ट्रंप की धमकी के बीच चीन क्यूबा की मदद के लिए आगे आया है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:29 PM IST

कैरेबियाई देश क्यूबा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के निशाने पर है. हाल ही में ट्रंप ने कहा कि वो क्यूबा के साथ कुछ भी कर सकते हैं और कैसे भी करके क्यूबा पर अपना कंट्रोल स्थापित करेंगे. क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के मकसद से अमेरिका ने उसकी ईंधन सप्लाई पूरी तरह रोक दी है जिससे देश पूरी तरह अंधेरे में डूब गया है.  क्यूबा की इस नाकेबंदी के बीच ट्रंप की टैरिफ धमकियों के कारण कोई भी देश क्यूबा की मदद के लिए नहीं आ रहा है. इस बीच चीन ने क्यूबा को एनर्जी सप्लाई का बड़ा फैसला लिया है.

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क्यूबा चीन का पुराना सहयोगी है जो पिछले एक दशक से अमेरिका की धमकियों का सामना कर रहा है. ईरान जंग के बीच अब ट्रंप इस द्वीप पर कब्जे की प्लानिंग में है जिसकी मदद को अब चीन सामने आया है. चीन ने ऊर्जा की किल्लत से जूझ रहे क्यूबा को सौर ऊर्जा की पेशकश की है.

क्यूबा में चीन के राजदूत हुआ शिन ने दोनों देशों के संयुक्त एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर बात की. क्यूबा के विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन की मदद से चल रहे ये प्रोजेक्ट्स देश में 'जटिल बिजली संकट' को कम करने के प्रयास का हिस्सा हैं.

हुआ ने क्यूबा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'चीन हमेशा मानता है कि लैटिन अमेरिका और कैरेबियन स्वतंत्र और संप्रभु देशों का एक बड़ा परिवार हैं. ये देश किसी के भी पिछलग्गू नहीं हो सकते.'

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क्यूबाई मीडिया आउटलेट साइबरक्यूबा के अनुसार, राजदूत ने कहा कि चीन क्यूबा में नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स के जरिए उसकी मदद कर रहा है. वो देश की सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों के विकास पर काम कर रहा है.

ट्रंप ने क्यूबा पर कब्जा करने की धमकी दी

सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा को अपने कंट्रोल में लेने की बात कही. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा करने का 'सम्मान' जरूर मिलेगा. अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से क्यूबा का नेशनल ग्रिड बंद हो गया है जिस कारण सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हो गया था.

इससे पहले क्यूबा वेनेजुएला से तेल-गैस खरीदता था लेकिन जनवरी में ट्रंप ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा कर वेनेजुएला के ईंधन पर अपना कब्जा कर लिया है. ट्रंप ने क्यूबा को एनर्जी सप्लाई करने वाले अन्य देशों को धमकी दी है कि अगर वो क्यूबा तो तेल-गैस देते हैं तो उन्हें भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. 

ट्रंप प्रशासन क्यूबा में सत्ता परिवर्तन चाहता है जिसके तहत राष्ट्रपति डियाज-कैनेल को  हटाने की प्लानिंग है. लेकिन कैनेल अमेरिकी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है और वो क्यूबा की संप्रभुता पर जोर दे रहे हैं.

चीन का क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट क्यूबा में पकड़ रहा रफ्तार

इस मुश्किल घड़ी में चीन क्यूबा की मदद को आगे आया है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की तरफ से पहले ही 5,000 घरेलू सौर ऊर्जा उपकरण क्यूबा को दिए गए हैं, जिन्हें तीन क्लीनिकों और एक वृद्धाश्रम में लगाया गया है. इसके अलावा, चीन ने क्यूबा में 49 नए सोलर पार्क विकसित करने में मदद की है और 2028 तक और प्रोजेक्ट्स भी आने वाले हैं.

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एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल की शुरुआत में क्यूबा की कुल ऊर्जा उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत थी, जो इस महीने बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है.

हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के मुताबिक, चीन की स्वच्छ ऊर्जा से पिछले साल लगभग 15.4 खरब युआन (करीब 22 लाख डॉलर) का इकोनॉमिक आउटपुट आया है.

लैटिन अमेरिका और कैरेबियन एकेडमिक नेटवर्क ऑन चाइना के अनुसार, 2010 से 2024 के बीच चीन ने इस क्षेत्र में 70 नवीकरणीय एनर्जी प्रोजेक्ट्स में लगभग 34 अरब डॉलर का निवेश किया है.

लैटिन अमेरिका पारंपरिक रूप से अमेरिका का प्रभाव क्षेत्र रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में कई देशों ने चीनी निवेश, व्यापार और खनिज संसाधनों की तलाश के चलते चीन के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत किए हैं. क्यूबा लैटिन अमेरिका का पहला देश था जिसने चीन को कूटनीतिक मान्यता दी थी.

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