अगर ऐसा हुआ तो नष्ट हो जाएंगे चंद्रयान-3 के लैंडर-रोवर, इसरो चीफ ने बताया खतरा

भारत के मून मिशन चंद्रयान-3 ने बुधवार को सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर ली है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने गुरुवार को बताया कि चंद्रयान-3 का लैंडर और रोवर दोनों पूरी तरह से काम कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चांद की सतह पर चंद्रयान-3 को किस से खतरा है.

Advertisement
इसरो चीफ एस सोमनाथ (फाइल फोटो- गेटी) इसरो चीफ एस सोमनाथ (फाइल फोटो- गेटी)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

भारत ने बुधवार को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया है. ऐसा करते ही चांद की सतह पर कदम रखने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है. वहीं, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ ने गुरुवार को बताया है कि चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान दोनों अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और आगे भी हलचल होती रहेगी. हालांकि, उन्होंने इस मून मिशन में आने वाली आगे की चुनौतियों को लेकर भी अगाह किया है. 

Advertisement

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए इसरो चीफ ने कहा, "चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान दोनों पूरी तरह से ठीक है और सब कुछ बहुत अच्छे से काम कर रहा है. आगे भी कई तरह की मूवमेंट होंगी. चूंकि, चांद पर वायुमंडल मौजूद नहीं है. ऐसे में कोई भी वस्तु चंद्रयान-3 को हिट कर सकती है. यानी टक्कर मार सकती है. इसके अलावा थर्मल प्रॉब्लम और कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट की समस्या भी आ सकती है."

अगर ऐसा हुआ था नष्ट हो जाएगा लैंडर और रोवर 

इसरो चीफ एस सोमनाथ ने आगे कहा, "यदि कोई क्षुद्रग्रह या अन्य कोई अन्य वस्तु बहुत तेज गति से चंद्रयान-3 से टकराती है तो लैंडर और रोवर दोनों नष्ट हो जाएंगे. चंद्रमा की सतह को गौर से देखें तो सतह अंतरिक्ष पिंडों की निशानों से भड़ा पड़ा है. पृथ्वी पर भी हर घंटे लाखों अंतरिक्ष पिंड आते हैं, लेकिन हमें पता नहीं चलता. क्योंकि पृथ्वी पर वायुमंडल है और हमारा वायुमंडल उन सभी पिंडों को जला देता है."

Advertisement

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने भारतीय समयानुसार शाम 6 बजकर 4 मिनट पर दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की. इसरो के अनुसार, लैंडर से रोवर प्रज्ञान नीचे उतर गया है और चंद्रमा की सतह पर चक्कर लग रहा है. 

चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग पर इसरो चीफ ने कहा, "यह सिर्फ इसरो के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है. हर दूसरे भारतीय की तरह हमें भी इस बात पर गर्व है कि इस बार हमारी लैंडिंग सफल रही. हमने इतने सालों तक जो मेहनत की थी, यह उसका परिणाम है. आगे हम और अधिक चुनौतीपूर्ण मिशन करने के लिए तत्पर हैं. इसरो में हम कहते हैं कि अच्छे परिणाम का फल और अधिक मेहनत है. मुझे लगता है यही बात हममें से हर किसी को उत्साहित करेगी."

भारत का पहला सौर मिशन अगले महीने होगा लॉन्च

चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद इसरो 2 सितंबर 2023 को अपना पहला सौर मिशन लॉन्च करेगा. इसरो के इस  मिशन का नाम आदित्य-एल-1 (Aditya-L1) है. इसकी लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेश सेंटर से होगी. 

इसरो के स्पेश एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर नीलेश एम. देसाई के अनुसार, आदित्य एल-1 को PSLV रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. Aditya-L1 पंद्रह लाख किलोमीटर की दूरी 127 दिन में पूरी करेगा. इसे सूरज और धरती के बीच मौजूद प्वाइंट हैलो ऑर्बिट में तैनात किया. इसी जगह से यह सूरज का अध्ययन करेगा.

Advertisement

अब तक 22 सौर मिशन

सूरज पर अब तक अमेरिका, जर्मनी, यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने कुल 22 मिशन भेजे हैं. इसमें से एक मिशन फेल हुआ है, जबकि एक ने आंशिक सफलता हासिल की. 22 मिशन में सबसे ज्यादा मिशन NASA ने भेजे हैं. नासा ने पहला सूर्य मिशन पायोनियर-5 (Pioneer-5) साल 1960 में भेजा था. जर्मनी ने अपना पहला सूर्य मिशन 1974 में नासा के सहयोग से भेजा था. यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने अपना पहला मिशन नासा के साथ मिलकर 1994 में भेजा था.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement