क्या अरब मुल्कों की जमीन कब्जा लेगा इजरायल? US राजदूत के बयान पर अरब-मुस्लिम देशों का विरोध

अमेरिका के इजरायल में राजदूत माइक हकाबी के बयान पर 14 अरब और इस्लामिक देशों ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने अपने बयान में कहा था कि "इजरायल चाहे तो सब ले ले." अरब मुल्कों ने उनके बयान को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया.

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इजरायल पीएम नेतन्याहू ने मिडिल ईस्ट का मैप यूएन में 2023 में दिखाया था. (Photo- X) इजरायल पीएम नेतन्याहू ने मिडिल ईस्ट का मैप यूएन में 2023 में दिखाया था. (Photo- X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

इजरायल की सीमाओं और ऐतिहासिक दावों को लेकर अमेरिकी राजदूत के एक बयान पर मिडिल ईस्ट में नया विवाद खड़ा हो गया है. इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने एक टीवी इंटरव्यू में मिडिल ईस्ट के मुल्कों को लेकर कहा कि अगर इजरायल चाहे तो वह "सब कब्जा कर सकता है." इस टिप्पणी के बाद 14 अरब और इस्लामिक देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कड़ी निंदा की है.

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यह बयान एक इंटरव्यू के दौरान आया, जिसमें कमेंटेटर टकर कार्लसन ने राजदूत से पूछा कि क्या आधुनिक इजरायल का दावा उस भूभाग पर हो सकता है, जो इराक की यूफ्रेटीस नदी से लेकर मिस्र की नील नदी तक फैला माना जाता है. इस पर हकाबी ने जवाब दिया, "अगर वे सब ले लें तो भी ठीक होगा." यानी अगर इजरायल उन पूरे इलाके पर भी कब्जा कर ले तो वो सही होगा.

यह भी पढ़ें: इजरायल के खिलाफ 'सुन्नी एक्सिस' बना रहे तुर्की-सऊदी? परमाणु पाकिस्तान भी दे रहा साथ

22 सितंबर 2023 को यूएन नेतन्याहू ने 'द न्यू मिडिल ईस्ट' का नक्शा पेश कर सऊदी अरब के साथ संभावित संबंधों की रूपरेखा दर्शाई थी.

शनिवार रात दोहा से जारी संयुक्त बयान में कतर, मिस्र, जॉर्डन, यूएई, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालयों ने इन टिप्पणियों को "खतरनाक और भड़काऊ" बताया. साथ ही गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, अरब लीग और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सचिवालयों ने भी इस पर आपत्ति जताई.

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कब्जे वाले फिलिस्तीन क्षेत्र पर इजरायल का अधिकार नहीं

संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस तरह की बातें यह संकेत देती हैं कि इजरायल को अरब देशों की जमीन पर कब्जे का अधिकार मिल सकता है, जिसमें कब्जे वाला वेस्ट बैंक भी शामिल है. हस्ताक्षर करने वाले देशों ने साफ कहा कि "कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब भूमि पर इजरायल की कोई संप्रभुता नहीं है."

बयान में यह भी कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का "स्पष्ट उल्लंघन" हैं और क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं. इंटरव्यू में जिस विशाल क्षेत्र का जिक्र हुआ, उसमें आज का लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब के हिस्से शामिल होते हैं.

यह भी पढ़ें: ‘मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से पर इजरायल का अधिकार’, अमेरिकी राजदूत के बयान पर बवाल

अमेरिकी राजदूत का बयान और इजरायल का 'ग्रेटर इजरायल' का सपना

बढ़ते विवाद के बीच अमेरिकी राजदूत हकाबी ने बाद में अपने बयान को "कुछ हद तक अतिशयोक्ति" बताया और कहा कि इजरायल अपनी मौजूदा सीमाओं का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि उसे अपनी वर्तमान जमीन के भीतर सुरक्षा का अधिकार है. हालांकि, उनके बयान की चौतरफा आलोचना हुई और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बयान को इजरायल के ग्रेटर इजरायल प्लान से भी जोड़ा.

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इसके बावजूद अरब और इस्लामिक देशों ने ऐसे "उकसाने वाले बयानों" को तुरंत रोकने की मांग की है, यह कहते हुए कि दूसरों की जमीन पर नियंत्रण को वैध ठहराने वाली बातें शांति नहीं, बल्कि तनाव और हिंसा को बढ़ावा देती हैं.

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