हांगकांग में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, सड़कों पर उतरा जनसैलाब

बड़ी संख्या में लोग चीन में प्रत्यर्पण की योजना के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं. इससे पहले साल 1997 में हांगकांग को चीन को सौंपे जाने पर सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ था.

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हांगकांग में विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो) हांगकांग में विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2019,
  • अपडेटेड 8:16 AM IST

हांगकांग में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों का दौर जारी है. बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने शहर की प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया. बता दें, हांगकांग में नए प्रत्यर्पण कानून के विरोध में अब तक सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ हो रहा है. बड़ी संख्या में लोग चीन में प्रत्यर्पण की योजना के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं. इससे पहले साल 1997 में हांगकांग को चीन को सौंपे जाने पर सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ था.

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यहां विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. रविवार को विवादास्पद बिल को लेकर दस हजार लोगों ने प्रदर्शन किया. यह विवादास्पद बिल संदिग्ध लोगों को चीन को प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे सकता है. समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्टोरिया पार्क में विरोध जता रहे प्रदर्शनकर्ता जमा रहे. यह कई घंटों तक भरा रहा और पूरा सफेद नजर आया (विरोध जताने के लिए सफेद रंग चुना गया था) और छाते की वजह से पीले रंग का समूह दिखाई दिया. पीला रंग 2014 से लोकतंत्र के समर्थन का प्रतीक है, जिसे 'अंब्रेला रिवोल्यूशन' के नाम से जाना जाता है.

नए कानून को फरवरी में प्रस्तावित किया गया था और इस पर जुलाई में वोट होने की उम्मीद है. यह कानून हांगकांग के मुख्य कार्यकारी और अदालतों को उन देशों के प्रत्यर्पण अनुरोधों को प्रक्रिया में लाने की अनुमति देगा, जिनके साथ पूर्व के ब्रिटेन का प्रत्यर्पण समझौता नहीं है. इसमें चीन, ताइवान और मकाओ शामिल हैं, जिन्हें बिना किसी कानूनी छानबीन के लाने की इजाजत होगी.

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इस नियम के मुताबिक, स्थानीय अदालतें निजी तौर पर मामलों को देखेंगी और प्रत्यर्पण को रोकने के लिए वीटो शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती हैं. हांगकांग के कार्यकारी का कहना है कि इस विषय का मकसद कानूनी गड़बड़ी को ठीक करना है. पार्क को जाने वाली सड़कें और आसपास के सबवे स्टेशन पूरी तरह से लोगों से भर गए थे. एक प्रदर्शनकारी ने एफे से कहा कि बिल कानून बन जाएगा, जो अगले महीने हो सकता है. हांगकांग अपनी स्वतंत्रता चीन के हाथों खो देगा और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.

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