मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है. बुधवार को अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी झंडे वाले तेल टैंकर पर चढ़ाई कर उसकी तलाशी ली. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह टैंकर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा था.
CENTCOM ने बताया कि 31st मरीन एक्सपीडेशनरी यूनिट के मरीन कमांडो ने "M/T सेलेशियल सी" नाम के टैंकर को रोका. करीब 120 मीटर लंबे इस जहाज पर चढ़कर अमेरिकी सैनिकों ने तलाशी अभियान चलाया. जांच के बाद जहाज को छोड़ दिया गया, लेकिन उसके क्रू को रास्ता बदलने का आदेश दिया गया.
अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में ईरान से जुड़े जहाजों पर कड़ी नजर रख रहा है. CENTCOM के मुताबिक अब तक 91 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने ईरान पर नए सैन्य हमले की योजना फिलहाल रोक दी है. ट्रंप के मुताबिक, खाड़ी देशों के अनुरोध के बाद उन्होंने सैन्य कार्रवाई टालते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखा है.
दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने फिर हमला किया, तो जंग पूरे मध्य पूर्व से बाहर तक फैल सकती है.
इसी बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत करने में जुट गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अब जहाजों के लिए "मल्टी-लेयर क्लियरेंस सिस्टम" लागू कर रहा है, जिसमें कुछ जहाजों से विशेष अनुमति और कथित तौर पर "फीस" भी ली जा रही है. ईरान ओमान के साथ मिलकर होर्मुज में "सस्टेनेबल सिक्योरिटी मैकेनिज्म" तैयार करने की कोशिश कर रहा है.
हालांकि अमेरिका ने दुनिया के देशों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे ईरान के ऐसे किसी नियंत्रण तंत्र को स्वीकार न करें. लेकिन ऊर्जा संकट से जूझ रहे कई देश और कंपनियां जोखिम उठाकर भी रास्ता तलाशने में लगे हैं.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइनों में से एक है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. फरवरी में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी.
अमेरिका का दावा है कि करीब 90 देशों के 1500 से ज्यादा जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इसके चलते दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है. अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौटेंगे या होर्मुज का यह टकराव बड़े सैन्य संघर्ष में बदल जाएगा.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क