'आज रात ईरान पर होगा हमला...', अमेरिकी स्ट्राइक के खतरों के बीच डर का माहौल, रात की नींद भी हराम

अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान में डर और बेचैनी का माहौल गहराता जा रहा है. अफवाहों, सोशल मीडिया चर्चाओं और सैन्य तनाव ने आम लोगों की नींद छीन ली है. बाहर से हालात सामान्य दिखते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर लोग हर रात किसी बड़े हमले के इंतजार और मानसिक दबाव में जी रहे हैं.

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अमेरिका ने अपना नौसैन्य बेड़ा ईरान के आसपास भेज दिया है. (Photo- ITG) अमेरिका ने अपना नौसैन्य बेड़ा ईरान के आसपास भेज दिया है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:03 AM IST

अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान में डर और बेचैनी का माहौल गहराता जा रहा है. बीती 30 जनवरी की रात जैसे ही अंधेरा छाया, ईरान के भीतर और विदेशों में रह रहे ईरानियों के बीच यह आशंका फैल गई कि अमेरिका किसी भी वक्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है. अफवाहों और सोशल मीडिया की चर्चाओं ने लोगों की रातों की नींद छीन ली है.

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तेहरान में रहने वाले 43 वर्षीय इंजीनियर मिलाद कहते हैं कि उस रात वह सुबह तक सो नहीं पाए. उन्हें हर पल धमाके की आवाज सुनाई देने का डर था. वे बार-बार जागकर यह सुनने की कोशिश करते रहे कि कहीं बम गिरने की आवाज तो नहीं आ रही. उनका कहना है कि अब हर रात यही डर बना रहता है कि "देखते हैं आज रात क्या होता है."

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ईरान की राजधानी के पूर्वी हिस्से में रहने वाली 68 वर्षीय शोहरेह हर सुबह पार्क में एक्सरसाइज करने जाती हैं. 31 जनवरी की सुबह जब वह घर लौटीं तो उन्होंने बताया कि पार्क में मौजूद लगभग सभी लोग यही कह रहे थे कि हमला आज रात हो सकता है. शोहरेह विदेशी हमले के खिलाफ हैं, लेकिन उनका कहना है कि लोग मानसिक रूप से टूटते जा रहे हैं. उन्हें लगता है कि किसी भी तरह से हालात बदल जाएं, भले ही उसकी कीमत युद्ध ही क्यों न हो.

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खुलकर युद्ध की बात भी नहीं कर रहे लोग!

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध के संकेत देने और मध्य पूर्व में बड़े अमेरिकी सैन्य बेड़े की तैनाती ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है. यह केवल सैन्य तनाव नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई दे रहा है. 32 वर्षीय सरकारी कर्मचारी अरजू बताती हैं कि लोग खुलकर युद्ध की बात करने से बच रहे हैं, क्योंकि पिछले साल इजरायल के साथ हुए भीषण संघर्ष की यादें अब भी ताजा हैं. फिर भी हर कोई पहले विस्फोट का इंतजार कर रहा है.

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सोशल मीडिया पर डर-अफवाह का माहौल

सोशल मीडिया पर मिसाइल और बम हमलों से बचने के उपायों की भरमार है. इंटरनेट बंदी के बाद जब सोशल मीडिया फिर से सुलभ हुआ, तो डर और अफवाहें और तेजी से फैलने लगीं. कई लोग जरूरी सामान जमा कर रहे हैं, भले ही उन्हें खुद न पता हो कि यह डर हकीकत बनेगा या नहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल ईरान के शहरों में बाहरी तौर पर हालात सामान्य हैं. पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नहीं हैं, दुकानें खुली हैं और बच्चे रोज की तरह स्कूल बस का इंतजार कर रहे हैं. फिर भी लोगों के मन में यह डर गहराया हुआ है कि उनकी जिंदगी और मौत अब दूसरों के लिए सिर्फ एक खेल बनकर रह गई है.

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