भारत-अफगान की दोस्ती से पाकिस्तान को लगी मिर्ची, अब तालिबानी मंत्री ने कर दी बोलती बंद

पाकिस्तान को जवाब देते हुए अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्तकी ने कहा, 'पहले पाकिस्तान ने हम पर टीटीपी को शरण देने का इल्ज़ाम लगाया, फिर बीएलए का और अब भारत का नाम ले रहा है. हमारे भारत से संबंध सिर्फ राजनीतिक और आर्थिक हैं. हमारी नीति पूरी तरह स्वतंत्र है और हमें किसी भी देश से संबंध रखने का पूरा अधिकार है.'

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अफगान विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब. (File Photo: PTI) अफगान विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

भारत-अफगान की बढ़ती नजदीकियों से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और वह लगातार तालिबान की आलोचना कर रही है. अब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने दो टूक जवाब देकर पाकिस्तानी की बोलती बंद कर दी है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की नीति स्वतंत्र है और उसे किसी भी देश के साथ संबंध बनाने का पूरा अधिकार है. 

दरअसल, पाकिस्तान ने काबुल और नई दिल्ली के बढ़ते संबंधों को लेकर आलोचना की थी. इसके जवाब में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी पाकिस्तान को आईना दिखाया है. मुत्तकी ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ उनके संबंध राजनीतिक और आर्थिक हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की नीति स्वतंत्र है और उन्हें किसी के भी साथ संबंध बनाने का अधिकार है.

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'पहले TTP के लिए ठहराया दोषी'

अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'पहले पाकिस्तान ने हमें TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के लिए दोषी ठहराया, फिर BLA (बलूच लिबरेशन आर्मी) के लिए और अब वे भारत को दोष दे रहे हैं.

'हमारी नीति स्वतंत्र'

मुत्तकी ने जोर देकर कहा कि हमारे भारत के साथ सम्बन्ध राजनीतिक और आर्थिक हैं. हमारी नीति स्वतंत्र है और हमें किसी के साथ भी संबंध बनाने का पूरा अधिकार है.

अफगानिस्तान ने PAK से किया सवाल

अफगान विदेश मंत्री ने पाकिस्तान से सवाल किया कि क्या पाकिस्तान का भारत में दूतावास (एंबेसी) नहीं है? तो फिर हमें भारत के साथ संबंध क्यों नहीं बनाने चाहिए?. उन्होंने साफ कहा कि अफगानिस्तान भारत के साथ अपने संबंध बनाए रखेगा और हम सहयोग जारी रखेंगे.

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मुत्तकी का ये बयान इस बात को दिखाता है कि अफगानिस्तान अब अपने विदेश संबंधों को लेकर किसी भी बाहरी दबाव या आलोचना को स्वीकार नहीं करेगा. मुत्तकी का ये कड़ा रुख क्षेत्रीय कूटनीति में बढ़ते तनाव को उजागर करता है.

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