पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में 'वेस्ट बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट 1950' के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था, जिसके बाद सूबे में नया विवाद शुरू हो गया है. इस नोटिस के जवाब में एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने सरकार को सीधी चुनौती दी है.
कबीर ने कहा कि कुर्बानी के लिए गाय, बकरी, ऊंट और दुम्बा जैसे सभी जायज पशुओं की बलि दी जाएगी और इसे कोई रोक नहीं सकता.
हुमायूं कबीर ने कहा, "कोई भी इस परंपरा पर आपत्ति करेगा, तो उसे सुना नहीं जाएगा और कुर्बानी का सिलसिला हमेशा की तरह जारी रहेगा."
'1400 साल पुरानी परंपरा...'
हुमायूं कबीर ने अपने बयान में कहा कि यह धार्मिक परंपरा 1400 साल से भी ज्यादा पुरानी है और जब तक यह दुनिया कायम रहेगी, तब तक यह कुर्बानी की रस्म निभाई जाती रहेगी. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन भले ही बीफ न खाने के नियम बना ले, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान के रूप में की जाने वाली कुर्बानी को किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया जाएगा.
सरकार के फैसले के खिलाफ महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस हालिया नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसमें ईद से पहले गायों और भैंसों की कुर्बानी पर रोक लगाई गई है. इस मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को सांसद महुआ मोइत्रा कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश हुईं. उन्होंने दलील देते हुए कहा कि इन पाबंदियों का राज्य के गरीब पशु पालकों पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने इस मामले में छूट की मांग की.
यह याचिका तृणमूल विधायक अखरुज्जमां ने दायर की थी. उन्होंने राज्य सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी है, जिसके तहत सांडों, बैलों, गायों, बछड़ों और भैंसों की उम्र और शारीरिक हालत का जायजा लेने के बाद अधिकारियों द्वारा जारी 'फिट सर्टिफिकेट' के बिना इन पशुओं को काटने पर रोक लगा दी गई है.
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कोर्ट के सामने पेश होते हुए मोइत्रा ने दलील देते हुए कहा कि इस नोटिफिकेशन से उन आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को भारी आर्थिक नुकसान होगा, जिनकी रोजी-रोटी पशु पालन पर ही निर्भर है.
उन्होंने बेंच के सामने कहा, “राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना से राज्य के गरीब लोगों को आर्थिक नुकसान होगा. गरीब लोग इस उम्मीद के साथ मवेशी पालते हैं कि उन्हें बेचकर कुछ आर्थिक बचत होगी, लेकिन प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से आम लोगों को ही नुकसान पहुंचेगा.”
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