पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला है. ममता बनर्जी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने पद से सबसे पहले इस्तीफा दे देना चाहिए. उनका यह गुस्सा मतदाता सूची से लोगों के नाम कथित तौर पर मनमाने ढंग से हटाए जाने को लेकर फूटा है. ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जिन लोगों के वोटों से मोदी प्रधानमंत्री बने, अब उन्हीं के नाम लिस्ट से क्यों गायब किए जा रहे हैं?
कोलकाता के बीचों-बीच चल रहे एक धरना प्रदर्शन के दौरान सीएम ममता ने चुनाव आयोग को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को खुद प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए. ममता बनर्जी ने तर्क दिया कि अगर साल 2024 में इसी वोटर लिस्ट के आधार पर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे, तो अब उसी लिस्ट में शामिल लोगों को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है?
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बता दें कि बंगाल में चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले निर्वाचन आयोग एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया चला रहा है. सीएम ममता का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर वोटरों के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं.
राज्यपाल के इस्तीफे पर गहराया शक
सीएम ममता बनर्जी ने सिर्फ वोटर लिस्ट पर ही नहीं, बल्कि बंगाल के राज्यपाल के अचानक इस्तीफा देने पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जब सी वी आनंद बोस के कार्यकाल के अभी 3 साल बाकी थे, तो उन्होंने 5 मार्च को अचानक पद क्यों छोड़ दिया? उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिर पर्दे के पीछे चल क्या रहा है.
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उपराष्ट्रपति धनखड़ को भी घेरे में लिया
अपनी बात जारी रखते हुए टीएमसी (TMC) सुप्रीमो ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का भी जिक्र किया. धनखड़ पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं. सीएम ममता ने सवाल उठाया कि आखिर पिछले साल जुलाई में धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा क्यों दिया था? उन्होंने साफ कहा कि चाहे आनंद बोस हों या जगदीप धनखड़, इन दोनों के इस्तीफों की जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
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