'हमारे बुरे दिन खत्म...', टीएमसी की दुर्गति में CPI(M) को दिख रही खुद की जीत!

सीपीआई (एम) का कहना है कि टीएमसी की हार के बाद बंगाल में आतंक का माहौल खत्म हो चुका है. अब स्थिति सामान्य हो रही है. पार्टी कार्यकर्ता लोगों से मिल रहे हैं और बुरे दिन खत्म हो गए हैं.

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हुगली में सीपीआई (एम) ने कुछ यूं अंदाज में किया था प्रचार (Photo: PTI) हुगली में सीपीआई (एम) ने कुछ यूं अंदाज में किया था प्रचार (Photo: PTI)

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली/कोलकाता,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

पश्चिम बंगाल के नतीजे के बाद राज्य की सियासी तस्वीर बिल्कुल बदल गई है. बीजेपी की प्रचंड जीत ने तृणमूल कांग्रेस को हिलाकर रख दिया है. हालांकि, चुनाव में हाशिए पर रहने वाली और सिर्फ एक विधानसभा सीट जीतने वाली सीपीआई (एम) का मानना है कि पार्टी के बुरे दिन खत्म हो गए हैं. अब जो भी होगा, बस अच्छा ही होगा.

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सीपीआई (एम) नेता हनन मोल्ला ने कहा कि इन नतीजों के बाद बंगाल में हमारे बुरे दिन खत्म हुए. हालांकि, अच्छे दिन आना अभी बाकी हैं. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी राज में लेफ्ट के एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ता मारे गए. करीब एक लाख कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले दर्ज किए गए. संगठन को तोड़ा गया और 400 दफ्तरों पर कब्जा किया गया. टीएमसी का शासन वाम मोर्चे के खिलाफ अभिशाप था.

हनन का कहना है कि टीएमसी ने आतंक का माहौल बनाया. हमने वर्षों बाद इसका प्रतिरोध भी किया. अब वह आतंक का माहौल खत्म हो चुका है. टीएमसी शासन के दौरान भ्रष्टाचार चरम पर था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है. हमारे कार्यकर्ता लोगों से मिल रहे हैं. हम अब खड़े होकर आगे बढ़ सकते हैं. यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. हमारे बुरे दिन खत्म हो गए हैं.

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'कई सीटों पर वोटिंग प्रतिशत बढ़ा'
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट पार्टियों को सिर्फ एक विधानसभा सीट मिली है. पार्टी नेता वृंदा करात ने कहा कि इस चुनाव में TMC और BJP के ध्रुवीकरण और धनबल में भी लेफ्ट ने अपनी पोजीशन को कुछ हद तक मजबूत किया. कई सीटों पर वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है. इस ध्रुवीकरण में हमने अपने जनाधार को बचा रखा है.

आजतक से बातचीत में हुए वृंदा करात ने कहा कि 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने दमनकारी नीति से लेफ्ट को टारगेट किया. चुनाव नतीजे से हम नहीं कहेंगे कि संतुष्ट हैं. ये कहा जा रहा है कि लेफ्ट समाप्त हो गया है, हम सहमत नहीं हैं.

करात का कहना है कि निश्चित रूप से तृणमूल की सरकार गुंडागर्दी, माफिया राज और भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त एंटी-इनकम्बेंसी थी. टीएमसी बंगाल पर बोझ बन गई थी, लेकिन बीजेपी की जीत भी जनवादी प्रणाली पर बड़ा खतरा है. जिस तरह एसआईआर से वोटर लिस्ट को चुन-चुनकर फायदे के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया गया और सेंट्रल फोर्स को इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त किया गया, ये सब खतरनाक है.

ममता बनर्जी पर कटाक्ष
करात ने कहा, 'बंगाल में जो सीट हम जीते हैं, वहां हमारे एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. हिंसा तृणमूल कांग्रेस की संस्कृति है और अभी तृणमूल कांग्रेस के सभी बीजेपी में जा रहे हैं. ममता बनर्जी ने भी कहा कि जो जा रहा है, खुद को बचाने के लिए जा रहा है'. 

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सीपीआई (एम) नेता ने कहा कि मुर्शिदाबाद में लेनिन की मूर्ति तोड़ दी गई. टीएमसी शासन में लेफ्ट के कई दफ्तरों को तोड़ा गया. हजारों कार्यकर्ता घरों से बेघर किए गए. तृणमूल की गुंडागर्दी के कारण आज वही हथियार बीजेपी इस्तेमाल कर रही है. हम इसकी निंदा करते हैं.

केरल और पश्चिम बंगाल में हार पर करात ने कहा कि हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण विचारधारा है. जितना भी लोग कहें, लेफ्ट खत्म हो गया, दुनिया में खत्म हो गया लेकिन फिर भी पार्टी की विचारधारा पर उन्हें बोलना पड़ता है. जब तक लोगों का शोषण होगा, तब तक लेफ्ट खत्म नहीं होगा. निश्चित रूप से चुनावी मैदान में इस प्रकार कमजोर होना हमारे लिए चुनौती है और हम आत्ममंथन करेंगे.

बंगाल में किस पार्टी को कितनी सीटें
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर वोट डाले गए थे. फलता में हिंसा की वजह से 21 मई को री-पोलिंग है. इस सीट पर 24 मई को नतीजे आएंगे. 4 मई को 293 विधानसभा सीटों पर हुई काउंटिंग में बीजेपी को 207, टीएमसी को 80, कांग्रेस को दो, हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP को एक, CPI(M) को एक और AISF को एक सीट पर जीत मिली. 

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