जहांगीर खान के 'सरेंडर' पर TMC में कलह, विधायकों ने अभिषेक बनर्जी को घेरा

टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनाव मैदान से हटने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. टीएमसी विधायकों की बैठक में कई नेताओं ने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाए. कुछ विधायकों ने अप्रत्यक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी को निशाने पर लिया, जबकि उनके विवादित बयानों की भी चर्चा हुई.

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 जहांगीर खान के फलता में चुनाव मैदान से हटने पर टीएमसी में बगावत के सुर उभरने लगे हैं. (Photo: PTI) जहांगीर खान के फलता में चुनाव मैदान से हटने पर टीएमसी में बगावत के सुर उभरने लगे हैं. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:30 PM IST

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार जहांगीर खान के नाम वापस लेने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. कालीघाट में मंगलवार को हुई टीएमसी विधायकों की बैठक में कई नेताओं ने पार्टी संगठन और फलता में हुए घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए. बैठक में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे.

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सूत्रों के मुताबिक कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने जहांगीर खान के चुनाव से हटने को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए. तीनों विधायक एक ही गाड़ी में बैठक में पहुंचे थे, जिसे राजनीतिक हलकों में खास संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. नेताओं ने पूछा कि मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव छोड़ने के बावजूद जहांगीर खान के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई. कुछ टिप्पणियां अप्रत्यक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाकर की गईं, क्योंकि फलता विधानसभा सीट उनके डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. 

जहांगीर खान को लेकर TMC में बगावत के सुर

दो वरिष्ठ विधायकों ने तंज कसते हुए जहांगीर खान को 'केंद्र शासित प्रदेश का नेता' तक बता दिया. बैठक में यह सवाल भी उठा कि पार्टी संगठन और प्रभावशाली नेताओं का समर्थन मिलने के बावजूद जहांगीर खान ने आखिर चुनाव मैदान क्यों छोड़ दिया. हाल के हफ्तों में फलता सीट राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित रही है. 29 अप्रैल को यहां हुए मतदान को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया गया था. चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि जहांगीर खान ने उनसे इलाके में श्मशान घाट बनवाने की मांग की थी और 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद 'हार्ट अटैक से मरने वालों' का अंतिम संस्कार वहीं किया जाएगा. 

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सूत्रों के अनुसार बैठक में अभिषेक बनर्जी के इस बयान का भी जिक्र हुआ और कुछ विधायकों ने सवाल किया कि अब श्मशान घाट कौन बनवाएगा और किसके लिए बनेगा. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ​कुछ विधायकों की इन टिप्पणियों को संगठन के भीतर बढ़ती बेचैनी और चुनाव बाद की रणनीति को लेकर चल रही आंतरिक चर्चा का संकेत माना है. बैठक ऐसे समय हुई जब अभिषेक बनर्जी की हालिया राजनीतिक सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों और अदालतों में सक्रिय नजर आईं, जबकि अभिषेक अपेक्षाकृत कम दिखाई दिए. 

टीएमसी की बैठक में नहीं पहुंचे 15 विधायक

फलता सीट उनके संसदीय क्षेत्र में होने के बावजूद वह वहां प्रचार में प्रमुखता से नजर नहीं आए. सूत्रों के मुताबिक बैठक में करीब 15 विधायक अनुपस्थित रहे. कुछ विधायकों ने स्वास्थ्य कारण बताए, जबकि मालदा के एक विधायक ने नेतृत्व को सूचित किया कि वह काम से दिल्ली गए हुए हैं. इससे राजनीतिक हलकों में संभावित राजनीतिक हलचल को लेकर अटकलें भी शुरू हो गई हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. बैठक में बालीगंज विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने से जुड़ी चर्चा भी हुई. सूत्रों के अनुसार कई विधायकों ने उनके समर्थन में पत्र पर हस्ताक्षर किए.

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इसी बीच अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता नगर निगम (KMC) की ओर से उनकी कुछ संपत्तियों को लेकर जारी नोटिसों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी. बैठक में उन्होंने कहा कि नोटिस या धमकियों से वह झुकने वाले नहीं हैं. बैठक में मौजूद एक टीएमसी विधायक के अनुसार अभिषेक ने कहा, 'चाहे मेरा घर तोड़ दें, चाहे नोटिस भेज दें, मैं सिर नहीं झुकाऊंगा. बीजेपी के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी.' दरअसल हाल ही में कोलकाता नगर निगम ने दक्षिण कोलकाता के हरीश मुखर्जी रोड और कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियों में निर्माण से संबंधित नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए हैं, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया है.

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