बंगाल में इमाम-पुरोहित भत्ता बंद, CM शुभेंदु बोले- शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करेंगे ये पैसा

पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इमामों और पुरोहितों को मिलने वाले धर्म आधारित भत्तों को बंद कर दिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकारी धन अब शिक्षा और मेधावी छात्रों पर खर्च होगा.

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पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने पूर्व की ममता सरकार के दौरान शुरू हुए इमाम-पुरोहित भत्ता योजना को बंद किया. (Photo: PTI) पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने पूर्व की ममता सरकार के दौरान शुरू हुए इमाम-पुरोहित भत्ता योजना को बंद किया. (Photo: PTI)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:59 PM IST

पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए इमामों और पुरोहितों को दिए जाने वाले भत्तों को बंद करने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल धार्मिक भत्तों पर नहीं, बल्कि अच्छी शिक्षा और मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए होना चाहिए.

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कैबिनेट बैठक में महिलाओं के लिए 3000 रुपये महीने की आर्थिक सहायता और मुफ्त बस यात्रा से जुड़ी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'सरकार को इमामों और पुरोहितों को भत्ता देने पर ध्यान देना चाहिए या शिक्षा पर? आज कैबिनेट ने सभी धार्मिक भत्तों को समाप्त कर दिया है.'

उन्होंने कहा कि अब इन योजनाओं में खर्च होने वाला पैसा 'विवेकानंद मेरिटोरियस स्कॉलरशिप' में लगाया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा, 'इस स्कॉलरशिप का लाभ हर छात्र को मिलेगा. चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम, सिख, जैन या किसी भी राजनीतिक दल का समर्थक. पश्चिम बंगाल में अब तुष्टिकरण की राजनीति नहीं होगी.' शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि कैबिनेट ने मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के तहत चल रही धर्म आधारित सहायता योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला लिया है. 

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ममता बनर्जी सरकार में शुरू हुई थी योजना

उन्होंने कहा कि ये योजनाएं इस महीने के अंत तक जारी रहेंगी और उसके बाद औपचारिक रूप से समाप्त कर दी जाएंगी. हालांकि सरकार ने योजनाओं के नाम नहीं बताए, लेकिन पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के दौरान इमामों को हर महीने 3,000 रुपये और पुरोहितों को 2,000 रुपये का भत्ता दिया जाता था. इमाम भत्ता योजना वर्ष 2012 में शुरू हुई थी, जबकि पुरोहितों के लिए आर्थिक सहायता योजना सितंबर 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान लागू की गई थी.

कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने 2010 से 2024 के बीच ओबीसी श्रेणी में जोड़ी गई नई जातियों की सूची भी रद्द करने का निर्णय लिया. इनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से जुड़ी जातियों की थी. कलकत्ता हाई कोर्ट के 2024 के ओबीसी आरक्षण संबंधी फैसले में भी इसे असंवैधानिक और अवैध बताया गया था. ममता बनर्जी सरकार द्वारा लागू सब-कैटेगराइजेशन सिस्टम भी वापस ले लिया गया है.

महिलाओं को 1 जून से हर महीने 3,000 रुपये

पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने 'अन्नपूर्णा योजना' को मंजूरी दी है, जिसके तहत राज्य की महिलाओं को 1 जून से हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. यह योजना पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी के प्रमुख वादों में शामिल थी. सरकार ने यह भी फैसला लिया कि 1 जून से पूरे पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त होगी. इस बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को मुख्यमंत्री बनने के बाद अपना पहला 'जनता दरबार' भी लगाया.

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यह कार्यक्रम साल्ट लेक स्थित बीजेपी कार्यालय में हुआ, जहां छात्रों और आम लोगों ने अपनी शिकायतें और मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं. बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता दरबार अब सरकार की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा. बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि टीएमसी सरकार 15 साल में जो नहीं कर पाई, डबल इंजन सरकार ने अपने पहले ही हफ्ते में दिखाना शुरू कर दिया है.

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