योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: विस्थापित बंगाली हिंदुओं के पुनर्वास को मंजूरी, जानें कहां बसेंगे ये 99 परिवार

उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ में झील की जमीन पर रह रहे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के विस्थापित हिंदू परिवारों के लिए पुनर्वास योजना को हरी झंडी दे दी है. कैबिनेट बैठक में लिए गए इस निर्णय से वर्षों से अवैध रूप से रह रहे 99 परिवारों को अब कानपुर देहात में नया ठिकाना मिलेगा.

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उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Photo-UP CM Social media) उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Photo-UP CM Social media)

कुमार अभिषेक / आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में 32 में से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इसमें मेरठ जनपद की मवाना तहसील स्थित ग्राम नंगला गोसाई में रह रहे 99 विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन का महत्वपूर्ण फैसला शामिल है. 

ये परिवार वर्तमान में झील की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे हैं. सरकार अब इस झील क्षेत्र को खाली कराएगी और इन परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में विधिवत बसाएगी. प्रत्येक परिवार को आधा एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी, जिससे उनके स्थायी निवास की समस्या का समाधान हो सकेगा.

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सरकार ने इन परिवारों को बसाने के लिए कानपुर देहात के दो गांवों का चयन किया है. ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग की 11.1375 हेक्टेयर भूमि पर 50 परिवारों को जगह दी जाएगी. वहीं, ग्राम ताजपुर तरसौली में 10.530 हेक्टेयर भूमि पर शेष 49 परिवारों को पुनर्वासित किया जाएगा. पुनर्वास की यह जमीन प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर दी जाएगी, जिससे विस्थापितों को अपनी छत नसीब होगी.

90 वर्षों तक के पट्टे का प्रावधान

आवंटित होने वाली यह जमीन 30 वर्ष की अवधि के पट्टे पर दी जाएगी. खास बात यह है कि इस पट्टे को 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकरण करने का भी प्रावधान रखा गया है. नियमों के मुताबिक, पट्टे की अधिकतम अवधि कुल 90 वर्ष तक हो सकती है. सरकार के इस कदम का उद्देश्य झील की भूमि को मुक्त कराना और विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करना है.

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'कैशलेस इलाज' की सुविधा को मंजूरी

इसके अलावा यूपी सरकार ने शिक्षा जगत के करीब 15 लाख कर्मियों को बड़ी राहत देते हुए 'कैशलेस इलाज' की सुविधा को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में तय हुआ कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइए और शिक्षणेत्तर कर्मी अब सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज करा सकेंगे.

योजना की मुख्य बातें:

लाभार्थी: राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षक व कर्मी। यह सुविधा उनके आश्रितों को भी मिलेगी.

बजट: योजना पर कुल 448 करोड़ रुपये (बेसिक हेतु ₹358.61 करोड़ और माध्यमिक हेतु ₹89.25 करोड़) का वार्षिक खर्च होगा.

सुविधा: इलाज की दरें आयुष्मान भारत योजना के मानकों पर आधारित होंगी.

वेरिफिकेशन: स्ववित्तपोषित स्कूलों के कर्मियों का सत्यापन DIOS और BSA की कमेटी करेगी.

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 32 में से 30 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली है. ध्यान रहे कि जो कर्मी पहले से आयुष्मान या अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा.

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