'गोली मार दो, लेकिन...', यौन शोषण की FIR पर बोले अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. यह एफआईआर यौन शोषण को लेकर दर्ज की गई है. वहीं अब इस पूरे मामले में अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद का बयान आया है.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद. (Photo: Screengrab) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद. (Photo: Screengrab)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर यौन शोषण की FIR दर्ज की गई है. इस मामले में अब मुकुंदानंद का बयान आया है. उन्होंने कहा कि गोली मार दो, लेकिन ऐसा घृणित आरोप मत लगाओ. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद चरित्रवान हैं और क्रिस्टल की तरह साफ हैं. जबकि आरोप लगाने वाला आशुतोष हिस्ट्रीशीटर है. जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है. आशुतोष और उसके पूरे परिवार का यही धंधा है, फर्जी मुकदमे करके ब्लैकमेलिंग करना. 

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दरअसल वाराणसी के विद्या मठ आश्रम में वेदपाठी बटुकों के यौन शोषण मामले में कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में न केवल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर, बल्कि उनके परम शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर भी FIR दर्ज की गई है. इसपर आजतक से खास बातचीत में मुकुंदानंद ने अपना पक्ष रखा और सीधे तौर पर सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया. साथ ही उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को चरित्रवान बताया और इन सब के पीछे का कारण भी बताया.

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2500 साल के इतिहास में शंकराचार्य पर कभी नहीं लगा आरोप

मुकुंदानंद ने कहा कि शंकराचार्य हमेशा सत्य का साथ देते हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा हो रहा है. FIR दर्ज कराने वाले कोई शांकबरी पीठ का महंत नहीं है, बल्कि एक फर्जी व्यक्ति है. यूपी के शामली के कांधला थाना में उसकी हिस्ट्रीशीट है और वह A नंबर का अपराधी है. उसने अपने गुरु भद्राचार्य के आदेश से 2 अलग-अलग मुकदमा प्रयागराज में किया. पहले में उसने यह आरोप लगाया है कि मुकुंदानंद यानी मैंने उनका गला दबाया था और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने हथियार फेंककर मारने की कोशिश की. 

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जबकि 18 जनवरी को पूरे विश्व की मीडिया वहां मौजूद थी और उसी दिन का यह आरोप भी लगाया गया है. जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है. अब दूसरे आरोप में जज साहब ने FIR दर्ज करने की बात बताई है. जिसका स्वागत है. अब FIR के बाद जांच होगी तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा. हम लोगों को न्यायपालिका और संविधान पर पूरा भरोसा है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये हिंदूवादी सरकार है? क्योंकि यह सरकार शंकराचार्य के ऊपर ऐसा घिनौना आरोप लगाकर नीचता पर उतरेंगी नहीं सोचा था? कम से कम शंकराचार्य के पद की प्रतिष्ठा का तो ध्यान रखना चाहिए था.

गोली मार दो, लेकिन ऐसा आरोप मत लगाओ. इस तरह का घृणित आरोप क्यों लगा रहे हो? 2500 साल के इतिहास में इस तरह का आरोप किसी ने शंकराचार्य पर लगाने की हिम्मत नहीं की. क्योंकि शंकराचार्य का जीवन ऐसा रहा है. मुकुंदानंद ने कहा कि ये आरोप आशुतोष ने लगाया है. जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है. जो राम भद्राचार्य का शिष्य है और ये योगी-मोदी का खास है. चूकी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सत्य और कठोर बात कहते हैं, इसिलए इनको बुरा लगता है.

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सरकार शंकराचार्य का मुंह बंद कराना चाहती है, लेकिन इस नीचता पर उतर जाएगी. कभी नहीं सोचा था. जिस आशुतोष ने यह सबकुछ किया है वह जीवन भर लोगों के ऊपर फर्जी केस करके ब्लैकमेलिंग किया करता है. उसका केवल यही काम ही है. देशभर से आशुतोष से पीड़ित लोगों ने संपर्क किया. मुकुंदानंद ने बताया कि न केवल आशुतोष, बल्कि उसके भाई-बहन और पूरे परिवार इस तरह का कृत्य करते हैं. क्या रामभद्राचार्य आशुतोष के जरिये FIR कराकर शंकराचार्य की आवाज को दबा देंगे?

विद्यामठ की बदनामी पर भी दिया जवाब

विद्या मठ की बदनामी के सवाल पर भी मुकुंदानंद ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि विद्या मठ की बदनामी तब होगी जब आरोप सिद्ध होंगे. विद्या मठ की बदनामी कभी नहीं हो सकती है. क्योंकि विद्या मठ के स्वामी ने बच्चों के खातिर ही पूरा जीवन समर्पित कर दिया है. उतना काम न तो योगी-मोदी ने किया है और न ही रामभद्राचार्य ने किया है. विद्या मठ बदनाम नहीं होगा. शंकराचार्य पूरी तरह से चरित्रवान हैं. हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

शंकराचार्य भी आसान रास्ता चुनकर प्राइवेट जेट में घूमते हुए मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को आशीर्वाद दे सकते थे. लेकिन उन्होंने कठिनाई, सत्य का रास्ता चुना. उनका चरित्र पूरी तरह से क्रिस्टल है. अगर सत्य बोलना अपराध है तो हैं हम अपराधी. हम न तो योगी आदित्यनाथ के गुलाम हैं और न ही नरेंद्र मोदी के गुलाम हैं. हम किसी सरकार के गुलाम नहीं हैं. जो गलत करेगा उसका विरोध किया जाएगा. शंकराचार्य परम पवित्र हैं. 

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