यूपी का प्रयागराज इन दिनों तप रहा है. सड़कें तवे जैसी गर्म हैं... हवा ऐसे चल रही है जैसे किसी ने हीटर ऑन कर दिया हो... और सूरज मानो सीधे सिर पर उतर आया हो. हालत ये है कि तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है. और इस भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग अब AC नहीं... संगम का सहारा ले रहे हैं. त्रिवेणी संगम इन दिनों नेचुरल कूलिंग सेंटर बन गया है. कोई डुबकी लगा रहा है.... कोई घंटों तक पानी में बैठा हुआ है... तो कोई सिर तक पानी में डुबोकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रहा है.
संगम पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि गर्मी इतनी ज्यादा है कि पानी से बाहर निकलते ही शरीर दोबारा तपने लगता है. इसलिए लोग मिनटों नहीं... घंटों तक पानी में बैठे रहते हैं. किसी के हाथ में गमछा है... कोई सिर पर पानी डाल रहा है... कोई बच्चों को लेकर पानी में बैठा है. संगम तट पर हर तरफ एक ही लड़ाई दिख रही है- गर्मी से बचने की लड़ाई.
लेकिन संगम की तस्वीर भी बदल गई है... जनवरी-फरवरी में जहां माघ मेले के दौरान हर तरफ पानी ही पानी दिखाई देता था... अब वहां रेत के बड़े-बड़े टीले नजर आने लगे हैं. भीषण गर्मी ने गंगा और यमुना दोनों का जलस्तर कम कर दिया है. हालत ये है कि कई जगह श्रद्धालुओं को घुटने भर पानी में ही डुबकी लगानी पड़ रही है. लोग ठीक से स्नान भी नहीं कर पा रहे. संगम के बीचों-बीच अब बालू के टापू जैसे दृश्य दिखाई देने लगे हैं.
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स्थानीय लोग और श्रद्धालु कह रहे हैं कि इस बार की गर्मी ने हालत खराब कर दी है. दिन चढ़ते ही सड़कें खाली होने लगती हैं. लोग घरों में कैद हो रहे हैं. लेकिन जो संगम पहुंच रहे हैं, वो पानी छोड़ने का नाम नहीं ले रहे.
एक श्रद्धालु ने कहा कि पानी में बैठे रहो तो थोड़ी राहत मिलती है... बाहर आते ही लगता है जैसे आग लग गई हो. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो फिलहाल लोगों को राहत मिलने वाली नहीं है. अगले कुछ दिनों तक गर्म हवाएं और तेज धूप लोगों को और परेशान कर सकती हैं. यानी प्रयागराज में अभी सूरज का 'टॉर्चर' जारी रहेगा. शायद यही वजह है कि इन दिनों संगम में लोग गर्मी से बचने के लिए पहुंच रहे हैं. आस्था की डुबकी तो लग ही रही है... लेकिन इस वक्त संगम लोगों के लिए 'हीट थेरेपी' से बचने की सबसे बड़ी जगह बन चुका है.
पंकज श्रीवास्तव